जालना: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई मार्च का ऐलान कर दिया है। जरांगे पाटील के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 को अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए मार्च शुरू किया जाएगा। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच इस घोषणा के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन की नजर अब प्रस्तावित मुंबई मार्च पर है।
मनोज जरांगे पाटील का अनिश्चितकालीन अनशन 12 सितंबर को 15वें दिन में पहुंच गया। इसी दौरान अंतरवाली सराटी में मराठा समाज की बड़ी बैठक हुई। बैठक के बाद जरांगे पाटील ने समर्थकों को संबोधित करते हुए मुंबई जाने का ऐलान किया।
15 सितंबर को अंतरवाली सराटी से मुंबई कूच
मनोज जरांगे पाटील ने कहा कि मराठा समाज को किसी भी स्थिति में मुंबई जाना है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि रास्ते में किसी तरह की परेशानी आए तो उसमें समय बर्बाद नहीं करना है और समाज के दर्द तथा बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना है।
जरांगे पाटील ने अपने संबोधन में कहा, “हमें किसी भी हालत में मुंबई जाना है। हम 15 सितंबर को अंतरवाली से मुंबई के लिए निकलेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि समाज को इस साल अपनी मांग को लेकर जीत हासिल करने के उद्देश्य से आगे बढ़ना है।
मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन जारी
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। अंतरवाली सराटी में उनका अनिश्चितकालीन अनशन जारी है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पात्र मराठा लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र और उससे जुड़े आरक्षण लाभ दिलाने की मांग शामिल है।
जरांगे पाटील का कहना है कि मराठा समाज को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए सरकार को उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
प्रस्तावित मुंबई मार्च के बाद आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर भी जरांगे पाटील ने संकेत दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुंबई पहुंचने के बाद आजाद मैदान में आंदोलन की योजना है।
ऐसे में 15 सितंबर से शुरू होने वाला मुंबई मार्च महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन का अगला बड़ा चरण माना जा रहा है।
सरकार के सामने बढ़ सकती है चुनौती
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील रहा है। अंतरवाली सराटी से मुंबई तक प्रस्तावित मार्च में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 सितंबर से शुरू होने वाले मार्च से पहले सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।
