लखनऊ: योगी आदित्यनाथ साल 2008 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सांसद थे। उस समय मुख्तार अंसारी भी आपराधिक दुनिया में अपना नाम बना चुका था। उस दौरान योगी आदित्यनाथ की जान बाल बाल बची थी। कथित तौर पर मुख्तार अंसारी के गिरोह ने उनके काफिले पर हमला किया था। तब योगी के काफिले पर पथराव किया गया था और इसके बाद पेट्रोल बम से हमला और गोलीबारी हुई थी। उस वक्त योगी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी हमलावरों पर मुंहतोड़ जवाब दिया था। मौके की नजाकत को देखते हुए एक आईपीएस अधिकारी को तब स्थिति को संभालने का काम सौंपा गया था। तब उन्हें योगी आदित्यनाथ को सुरक्षित निकालने के लिए एक एके-47 और एक हेलीकॉप्टर दिया गया था। इससे मुख्तार के आतंक का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मऊ सदर सीट से पांच बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी साल 2005 से जेल में थे। उन पर 60 से ज्यादा मुकदमे चल रहे थे। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्हें अस्पताल ले जाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच उसका अंतिम संस्कार गाजीपुर के महमूदाबाद स्थित दर्जी टोले में किया गया।
योगी पर हमले की कहानी 7 सितंबर 2008 को आजमगढ़ में योगी आदित्यनाथ के काफिले पर हुए हमले की पूरी कहानी रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बृजलाल ने बताई है। इस कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि 6 लोग घायल हो गए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें एके-47 राइफल के साथ हेलीकॉप्टर से एयरड्रॉप किया गया था।
एके-47 लेकर पहुंचा था मुख्तार
बृजलाल के मुताबिक जब साल 2005 में मऊ में सांप्रदायिक दंगा भड़का था तब पांच बार के विधायक और माफिया नेता मुख्तार अंसारी खुली जीप में एके-47 लेकर चलते दिखाई दिए थे। उस समय योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद थे। वह स्वयं मऊ के लिए रवाना हुए थे लेकिन उन्हें जिले में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें दोहरीघाट पर रोककर वापस गोरखपुर भेज दिया गया। उस समय समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे।
योगी ने मुख़्तार को आतंकवादी कहा था
साल 2008 में योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार अंसारी को चुनौती देते हुए कहा था कि वह मऊ दंगे के पीड़ितों को न्याय दिलाएंगे। बृजलाल के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने आज़मगढ़ में हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ रैली की घोषणा की थी। 7 सितंबर 2008 को रैली के लिए डीएवी कॉलेज मैदान का चयन किया गया था।
हमले में योगी बाल-बाल बचे
योगी आदित्यनाथ लाल रंग की एसयूवी में सवार थे। उनके साथ करीब 40 गाड़ियों का काफिला चल रहा था। आजमगढ़ पहुंचने से पहले ही काफिले पर पथराव कर दिया गया। पेट्रोल बम फेंके गए और गोलीबारी हुई। योगी आदित्यनाथ के गनर ने भी फायरिंग की। यह केवल एक संयोग था कि योगी ने अंतिम समय में वाहन बदल लिया और अपनी लाल एसयूवी छोड़ दी, जिससे उनकी जान बच गई। यह एक सुनियोजित हमला था।
पूर्व आईपीएस बृजलाल ने कहा, ‘जैसे ही उन्हें हमले की जानकारी मिली, वे हेलीकॉप्टर से आजमगढ़ के लिए रवाना हुए और सिविल लाइंस में उतरे। चूँकि अन्य सभी अधिकारी पहले से ही व्यस्त थे। इसलिए मैंने एके 47 लिया और तत्कालीन मंडलायुक्त को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए कहा। मुझे आजमगढ़ की सड़कों पर एके-47 लेकर घूमना आज भी याद है। हमने लगातार छापेमारी की और हिंसा में शामिल कई लोगों पर मामला दर्ज किया।
जब साल 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कुछ हिस्सों में माफिया पर नकेल कसी। कई गिरोहों पर कार्रवाई की गई। आज माफिया डॉन और पेशेवर अपराधी अपनी जान की भीख मांग रहे हैं। यूपी में किसी माफिया डॉन या अपराधी की जगह नहीं है।
