मीरा भायंदर: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के मतदान खत्म होते ही मीरा भायंदर (Mira Bhayandar) शहर में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। हाल ही में उत्तन के रामभाउ म्हालघी प्रबोधनी में एक प्रशिक्षण वर्ग के दौरान विधायक गीता जैन, नरेंद्र मेहता और रवि व्यास ने उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से मुलाक़ात की। जिसके बाद यह चर्चा शुरू है कि इस बार भाजपा विधानसभा चुनाव में किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी। इस रेस में तीन नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। जिसमें वर्तमान निर्दलीय विधायक और महायुति सरकार को समर्थन दे रहीं गीता जैन, पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता और नये चेहरे के रूप में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और मीरा भायंदर विधानसभा चुनाव प्रमुख रवि व्यास का नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि विधायक गीता जैन ने चुनाव जीतने के बाद भाजपा को अपना समर्थन दिया लेकिन सत्ता बदलते ही महाविकास अघाड़ी में शामिल हो गईं और जिससे बीजेपी समर्थक आज भी नाराज हैं। गीता जैन ने आज भी महायुति को समर्थन तो दे रखा है लेकिन वो शिवसेना (शिंदे ) गुट के साथ हैं या फिर भाजपा के साथ इसको लेकर संशय की भावना पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता में भी बनी हुई है। साथ ही पिछले पांच सालों में उनके द्वारा किये गए कामकाज को लेकर भी बहुत उत्साह नहीं है। भ्रष्टाचार मिटाने के दावे भी फेल ही दिखे, बल्कि सिर्फ विवादित बयानों और वचन नामें के कार्यों को पूरा ना करने से जनता में नाराजगी दिखाई देती है।
विवादों में ज्यादा नजर आए नरेंद्र मेहता
दरअसल पिछले चुनाव में गीता जैन ने जिस तरह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भाजपा के सिटिंग ताकतवर विधायक नरेंद्र मेहता को पटखनी दी थी। उसे नरेंद्र मेहता की व्यक्तिगत हार के तौर पर देखा गया था। लोगों का कहना है कि गीता जैन नहीं जीते बल्कि भाजपा के उम्मीदवार होने के बावजूद नरेंद्र मेहता अपनी धूमिल छवि की वजह से चुनाव हारे। ख़ास बात ये है कि नरेंद्र मेहता आज भी नगरसेवकों और पार्टी में प्रभाव रखते है लेकिन उनपर भ्रष्टाचार के कई आरोप एक के बाद एक लगते रहे हैं। एक मामले मे तो सीधे तौर पर रिश्वत लेने का प्रकरण हाई कोर्ट में लंबित है।
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साथ ही उनका एक आपत्तिजनक वीडियो भी वायरल हुआ था जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया था जिसके बाद उन्होंने दिखावे के तौर पर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा भी कर दी थी लेकिन उनकी व्यक्तिगत महत्वकांक्षा और बिज़नेस की मज़बूरी ने उन्हें लौटने के लिए मजबूर कर दिया। अब भी उनके मैंग्रोव्स काट कर बने आलीशान 7/11 क्लब और अन्य संपत्ति विवाद को लेकर लगातार आरोप प्रत्यारोप और कानूनी प्रक्रिया का दौर जारी है। ऐसे में भाजपा इन दोनों चेहरों को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
मीरा भायंदर से नये चेहरे को मौका?
सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार मीरा भायंदर से नये चेहरे को मौका देने की मूड मे है। भाजपा ने प्रयोग के तौर पर पूर्व जिलाध्यक्ष रवि व्यास के स्थान पर पुराने कार्यकर्ता किशोर शर्मा को जिला अध्यक्ष नियुक्त करके और रवि व्यास को मीरा भायंदर विधानसभा चुनाव प्रमुख की अहम जिम्मेदारी देते हुए शहर में चल रही आपसी गुटबाजी को खत्म करने का पूरा प्रयास किया। हालांकि, जिला अध्यक्ष किशोर शर्मा मेहता के पाले में ज़्यादा दिखते हैं। इसलिए संगठन में तालमेल बनाने की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए। ऐसे में अब पार्टी नये चेहरे को मौका देने का मन बना चुकी है। इस रेस में रवि व्यास का नाम चर्चा में है।
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एक युवा, एडवोकेट और साफ़ सुथरी छवि के चलते जो पार्टी आदेशानुसार संगठन के कार्यों में लगे रहे और नरेंद्र मेहता के विरोध के बावजूद भी एक नया और मजबूत संगठन खड़ा किया। साथ ही सभी से सामंजस्य बनाकर काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बिना किसी शर्त या दबाव की राजनीति किए बिना महायुति उम्मीदवार के लिए काम किया वो भी आलाकमान के संज्ञान में गया है। अब देखना ये होगा कि किसकी लॉटरी लगेगी।
