लखनऊ: देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। इसके लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इंडिया गंठबंधन के तहत एक साथ आए हैं। हालांकि, अब इन दोनों पार्टियों के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं। दरअसल चार बार के सांसद रवि वर्मा ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। रवि वर्मा मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों के विश्वासपात्र माने जाते थे। रवि वर्मा पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में नजर नहीं आ रहे थे।
रवि प्रकाश वर्मा ने दो नवंबर को अपना इस्तीफा सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजा था। रवि वर्मा ने पत्र में लिखा, ‘लखीमपुरखीरी में पार्टी की आंतरिक स्थिति के कारण मैं काम करने में असमर्थ हूं।’ उन्होंने सपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।
लखीमपुर खीरी से तीन बार सांसद का चुनाव जीता
अखिलेश यादव ने रवि वर्मा की नाराजगी दूर करने की भी कोशिश की। हालांकि, इससे कोई फायदा नहीं हुआ। रवि वर्मा के जाने से अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर असर पड़ सकता है। वह पार्टी के एक गैर-यादव नेता थे। रवि प्रकाश वर्मा समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार होते थे। उन्होंने लखीमपुर खीरी से तीन बार सांसद का चुनाव जीता। वह 2009 तक सांसद रहे फिर वह चुनाव हार गए।
जिसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें राज्यसभा भेजा। इससे पहले उनकी बेटी पूर्वी वर्मा को पिछली बार समाजवादी पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया था लेकिन वह चुनाव हार गई थीं।
अब किस पार्टी में शामिल होंगे?
अब रवि प्रकाश वर्मा कांग्रेस में शामिल होंगे। आज उन्होंने समर्थकों की बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी का दम घुट रहा है। पार्टी मुलायम सिंह यादव के रास्ते से भटक गयी है। रवि वर्मा ने आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी में सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा खत्म हो गई है।
