मुंबई: जब गणेशोत्सव के दिनों में ढोल-ताशों की गूंज गलियों में फैलती है और “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है, तब हर दिल में भक्ति और उल्लास की लहर दौड़ जाती है। इसी भक्ति और संस्कृति की रोशनी को पिछले तीन दशकों से संजोए हुए है – श्री वरदविनायक चैरिटेबल ट्रस्ट सरवजनिक गणेशोत्सव मंडल।
1993 में स्थापित यह मंडल सिर्फ गणेशोत्सव मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका उद्देश्य हमेशा से समाज को जोड़ना और भारतीय संस्कृति की विरासत (वारसा) को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना रहा है। मंडल का मार्गदर्शक सूत्र भी यही है – “विरासत संस्कृति की” (वारसा संस्कृतीचा)।
गणेशोत्सव के साथ-साथ मंडल सालभर कई धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों का आयोजन करता है। गणेश जयंती, महाशिवरात्रि, अंगारकी चतुर्थी, कोजागिरी पौर्णिमा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे पर्वों को मंडल समाज की भागीदारी से भक्ति और उत्साह के साथ मनाता है।
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इन आयोजनों में सबसे विशेष है गणेश जयंती पालखी सोहळा। इस अवसर पर भगवान गणेश की सुंदर पालखी पूरे क्षेत्र में शोभायात्रा के रूप में निकाली जाती है। ढोल-ताशों की थाप, भक्तों की जय-जयकार और सजावट से सजी सड़कों का नजारा हर किसी के दिल में भक्ति और एकता का भाव जगाता है।
मंडल के सदस्य हर साल अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रेम से इन कार्यक्रमों को सफल बनाते हैं। उनका मानना है कि भारतीय संस्कृति (भारतीय संस्कृती) हमारी सबसे बड़ी धरोहर है और इसे नई पीढ़ी तक गर्व से पहुँचाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।
त्योहारों के जरिए मंडल का संदेश स्पष्ट है –
आस्था से जुड़ें, समाज से जुड़ें और संस्कृति की विरासत को सहेजें।
इसी भावना ने श्री वरदविनायक चैरिटेबल ट्रस्ट मंडल को मुंबई के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष स्थान दिलाया है।
