मुंबई। आगामी बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति तेज़ी से गर्माने लगी है। महायुति गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर चर्चा लगातार जारी है, और इसी बीच सूत्रों से जानकारी मिली है कि शिवसेना ने 90 से 100 सीटों की मांग कर दी है। इस मांग के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है।
शिवसेना का दावा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने सीटों का दावा अपनी पारंपरिक ताक़त के आधार पर किया है। दशकों से मुंबई के कई वार्डों में शिवसेना का मजबूत जनाधार रहा है, जिसे पार्टी आज भी अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानती है।
महालक्ष्मी, दादर, वडाला, अंधेरी, बांद्रा (पूर्व) से लेकर पूर्वी उपनगरों तक शिवसेना ने वर्षों तक अपना प्रभाव बनाए रखा है। पार्टी का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर उनका संगठनात्मक ढांचा अभी भी बेहद सक्रिय है, इसलिए उन्हें अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
दोनों गुटों की तैयारी तेज
2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद राजनीतिक समीकरण बदले जरूर हैं, लेकिन बीएमसी चुनाव को लेकर दोनों गुट आक्रामक मोड में हैं। बीएमसी चुनाव शिवसेना के लिए हमेशा से प्रतिष्ठा का विषय रहा है, इसलिए दोनों पक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने, बूथ मैनेजमेंट, पदाधिकारी बैठकों और जनसंपर्क को तेज़ कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में शिवसेना की पकड़ टूटने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर मौजूद कैडर अभी भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।
महायुति में सीट शेयरिंग पर बढ़ा तनाव
शिवसेना द्वारा 90–100 सीटों की मांग किए जाने के बाद महायुति गठबंधन में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना (शिंदे गुट)इन तीनों के बीच सीटों का बंटवारा बेहद संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि हर दल बीएमसी में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सूत्र बताते हैं कि गठबंधन के भीतर अभी तक सीट शेयरिंग पर कोई अंतिम फार्मूला तय नहीं किया गया है। बातचीत के कई दौर बाकी हैं, और सीटों की संख्या को लेकर सभी दल अपनी-अपनी दावेदारी पर अड़े हुए हैं।
मुंबई की सत्ता किसके हाथ आएगी?
बीएमसी देश का सबसे समृद्ध नगर निगम है और इसकी सत्ता पर कब्ज़ा किसी भी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश देती है। शिवसेना की सीट मांग ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अगले कुछ हफ्तों में महायुति की बैठकों के बाद यह साफ होगा कि क्या शिवसेना को 90–100 सीटों का बड़ा कोटा मिलता है या गठबंधन कोई नया गणित सामने लाता है। फिलहाल इतना तय है कि बीएमसी चुनाव की तैयारियों के साथ-साथ मुंबई की राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
