Monday, March 23, 2026
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Budget 2024 : टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं, लेकिन नियमित करदाताओं के लिए राहत का ऐलान; निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?

नई दिल्ली : आज लोकसभा में मोदी सरकार ने अपना 10 वां अर्थसंकल्प पेश किया, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समर्थन दिया. इससे पहले लोकसभा चुनावों के लिए तीन महीने का मुहूर्त नज़दीक आ रहा है, और इससे पहले यह अंतरिम अर्थसंकल्प तय किया गया है. इस अर्थसंकल्प में किसी भी नए परिवर्तन का प्रस्ताव नहीं किया गया है, साथ ही पुराने और नए करदाताओं के स्लैब को भी बरकरार रखा गया है.

निवडणुकें होने के बाद जुलाई महीने में नई सरकार पूर्ण अर्थसंकल्प पेश करेगी. लेकिन इस अर्थसंकल्प में किसी भी कर्मचारी के बदलाव का सुझाव नहीं दिया गया है, बल्कि केंद्र सरकार ने एक निर्णय के अनुसार सामान्य करदाताओं को कुछ राहत देने का प्रयास किया है. इसके अनुसार, केंद्र सरकार ने 2010 तक की 25 हजार रुपये तक की कर आय के मामले में कर की मांग कम की है, जबकि 2010 से 2014 तक की 10 हजार रुपये तक की कर आय के मामले में उसे बढ़ाया गया है. इससे देश के लाखों करदाताओं को फायदा होगा, ऐसा निर्मला सीतारमण ने दावा किया है.

इस घोषणा का क्या मतलब है?

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा अर्थसंकल्प में की गई घोषणाओं के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में जुड़े हुए कई मामलों की मांग बढ़ी है. इससे अनेक करदाताओं को इस घोषणा का फायदा मिला है. लेकिन, अब अर्थसंकल्प में यह घोषणा की गई है कि 2010 तक की मामलों में जिनकी कर आय 25 हजार रुपये तक थी, उन्हें नजरअंदाज किया गया है. अर्थात, अब ऐसे करदाताओं को कर भरणा करने की आवश्यकता नहीं है. साथ ही 2010 से 2014 तक की मामलों में जिनकी कर आय 10 हजार रुपये तक थी, उन्हें इस रकम का कर भरणा करने की आवश्यकता नहीं है.

सामान्य प्रक्रिया के अनुसार करदाताओं द्वारा कर भरणा करने के बाद उनमें कुछ तफावत आती है तो सरकार द्वारा उन्हें अधिक कर भरणे का निर्णय लिया जाता है. लेकिन, यदि यह करदाता निर्णय को मानता नहीं है, तो उसके लिए उस वर्ष के लिए कर भरणे में दिक्कत आती है. इस तरह की विलंबित प्रक्रिया के कारण ऐसे करदाताओं को उस वर्ष के बाद भी अधिक कर भरणे की जरूरत नहीं पड़ती. अब इस निर्णय से उन रकमों के करदाताओं को उनके लंबित करभरणे में कोई दिक्कत नहीं होगी.

करभरणे कितने प्रमाण में होते हैं?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 आर्थिक वर्ष में 8.18 करोड़ करदाताओं ने करभरणा किया है. यह आंकड़ा 31 दिसंबर 2023 तक है. पिछले वर्ष 31 दिसंबर 2022 तक 7.51 करोड़ करदाताओं ने करभरणा किया था. इसमें एक साल में 9 प्रतिशत की वृद्धि है.

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