Adani Hindenburg Case: सेबी अब अडानी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय बढ़ाने की मांग नहीं करेगी। इसकी जानकारी खुद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को दी है। सेबी की जांच अब अंतिम चरण में मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सेबी से पूछा कि वह निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए क्या कर रहा है। इसका जवाब देते हुए सेबी के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शॉर्ट-सेलिंग के मामलों में कार्रवाई की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मामले की जांच के लिए सेबी को और समय देने की जरूरत नहीं है। जनवरी में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई और उसका बाजार मूल्य करीब 150 अरब डॉलर कम हो गया। इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
इस नुकसान के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मार्च महीने में एक कमेटी का गठन किया था। साथ ही सेबी को मामले की जांच करने का आदेश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा खत्म
सेबी को 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी थी लेकिन समय सीमा खत्म होने से पहले सेबी ने सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने की डेडलाइन दी। यह समय सीमा 14 अगस्त को समाप्त हो गई है। भले ही सेबी ने वर्तमान स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) अदालत को सौंप दी है लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने मई में अपनी अंतरिम रिपोर्ट में अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी थी। समिति ने कहा था कि उसे गौतम अडानी की कंपनियों में हेरफेर का कोई सबूत नहीं मिला। समिति ने निवेशकों के फायदे के लिए सेबी को कुछ सिफारिशें भी दी हैं।
