Wednesday, March 25, 2026
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मोटापे को लेकर भारतीय डॉक्टरों के लिए नई गाइडलाइन जारी, BMI के अलावा ओबेसिटी आंकने के पैमाने जानिये

मुंबई: एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बॅरिएट्रिक सर्जन के एक समूह द्वारा जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (जेएपीआई) में हाल ही में प्रकाशित हुए एक जर्नल में मोटापे के लिए सिर्फ बीएमआई नहीं बल्कि अन्य संबंधित शारीरिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ओबेसिटी (मोटापे) के दिशानिर्देशों जारी किए हैं। मोटापे के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारी होने का खतरा रहता है। हाल ही में एक राष्ट्रव्यापी क्रॉस-सेक्शनल स्टडी के अनुसार, भारत में 100,531 वयस्कों का सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वेक्षण में पता चला कि देश में मोटापे की व्यापकता 40.3% है। जिसमें 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति शामिल हैं।

इसमें शहरी इलाको में रहने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा संख्या दक्षिण भारत (46.51%) में दर्ज की गई जबकि सबसे कम आंकड़े पूर्वी भारत (32.96%) में दर्ज किए गए। यह अनुमान लगाया गया है कि 20 से 69 वर्ष की आयु के भारतीय वयस्कों में मोटापे की व्यापकता साल 2040 तक तीन गुना हो जाएगी।

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2019 में भारत में 77 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित थे

मोटापा के साथ-साथ मधुमेह के मरीजों की संख्या भी बढ रही है। यह मुख्य रूप से गलत और असंतुलित जीवनशैली के कारण है। साल 2019 में भारत में 77 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित थे। साल 2045 तक यह संख्या बढ़कर 134 मिलियन से अधिक होने की उम्मीद हैं। इनमें से लगभग 57% व्यक्तियों का निदान नहीं हुआ हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेरिएट्रिक सर्जन अध्यक्ष डॉ. शशांक शाह ने कहा, ‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोटापा के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

भारत को मधुमेह की राजधानी के रूप में जाना जाता है। देश में ज्यादातर युवा मधुमेह से पीड़ित हैं। इसके अलावा मोटापा के कारण कैंसर, टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, घुटनों के गठिया और मानसिक बीमारी होने का खतरा रहता हैं।’

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बीएमआई के आधार पर मोटापे का अनुमान

डॉ. शाह ने आगे कहा, ‘बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार पर मोटापा का अनुमान लगाया जाता है। दिशानिर्देशों के अनुसार, भारत में, किसी व्यक्ति का वजन तब अधिक माना जाता है जब उसका बीएमआई 23-25 किग्रा/एम2 के बीच होता है, जबकि 25 किमी/एम २ से अधिक बीएमआई वाले व्यक्ति को मोटा माना जाता है। हालाँकि, भारतीय आबादी में कमर के आसपास, विशेष रूप से यकृत और अग्न्याशय जैसे आंतरिक अंगों के आसपास अतिरिक्त फैट जमा होने का खतरा होता है।

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जिससे मधुमेह जैसी बीमारी का खतरा बढता है। जिसे आंत का मोटापा या पेट का मोटापा भी कहा जाता है। महिलाओं में पेट का मोटापा ज्यादातर दिखाई देता है। मोटापे और मेटाबोलिक सिंड्रोम से पीड़ित भारतीय लोगों में हृदयरोग का खतरा अधिक होता है। भले ही उनका बॉडी मास इंडेक्स कुछ भी हो।

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