Kanpur: केंद्र सरकार द्वारा गंगा नदी को साफ करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन आदेशों और नियमों का पालन ना होने की वजह से गंगा नदी आज भी मैली है। बहरहाल गंगा में गंदा पानी बहाने वाली एजेंसियों पर अब कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित करने वाली लापरवाह एजेंसियों से 2.60 करोड़ रुपए की वसूली के आदेश जारी किए हैं।
यह पहली बार है जब जिला प्रशासन को रिकवरी नोटिस (आरसी) भेजकर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल करके 15 दिनों में विभाग के बैंक खाते में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
बोर्ड की तरफ से सख़्त कार्रवाई शुरू
गंगा एक्शन प्लान और नमामि गंगे जैसी योजनाओं के तहत करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन धरातल पर हालात नहीं सुधरे।ड एनजीटी के निर्देशों के बावजूद एसटीपी संचालन की एजेंसियों ने सुधार नहीं किया। लिहाजा अब बोर्ड की तरफ से सख़्त कार्रवाई शुरू की गई है। गंगा नदी के साथ ही पांडू और नून के किनारे सात एसटीपी का संचालन जल निगम से नामित एजेंसी करती है। इन सभी एसटीपी की प्रतिदिन लगभग 450 मिलियन लीटर सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता है, लेकिन हकीकत में 40 से 50 फीसदी क्षमता पर ही काम हो रहा है।
गंगा में गिर रहा सीवर का एक बड़ा हिस्सा
सीवर का एक बड़ा हिस्सा बिना ट्रीटमेंट के सीधे गंगा में गिर रहा है। यह लापरवाही नज़र में आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने वर्ष 2021 से 2024 तक बिनगवां के 210 एमएलडी, जाजमऊ के पांच और 130 एमएलडी एसटीपी पर 6 करोड़ 51 लाख 80 हजार पांच सौ रुपए का क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया है।
इस मामले में तीनों एसटीपी संचालक एजेंसियों को प्रदूषण बोर्ड ने नोटिस जारी करके जवाब मांगा था, जवाब संतोषजनक ना होने पर 2.60 करोड़ रुपए की आरसी जारी की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भू-राजस्व की वसूली की तरह एसटपी संचालक एजेंसियों से क्षतिपूर्ति की वसूली 15 दिनों में तय की जाए।
सात एसटीपी पर 10.58 करोड़ रुपए का लगा है क्षतिपूर्ति जुर्माना
शहर में सात एसटीपी का संचालन होता है, जिसमें पांच गंगा नदी और दो पांडु नदी और नून नदी के किनारे बनाए गए हैं। बीते चार वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एसटीपी संचालन करने वाली एजेंसियों को सुधार के लिए नोटिस जारी करता रहा है।इस दौरान इन सात एसटीपी पर 10.58 करोड़ का क्षतिपूर्ति जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, अभी तक जुर्माने की वसूली के लिए आरसी नहीं जारी की जाती थी।
ऐसा पहली बार हुआ हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भू-राजस्व विभाग की तरह पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली के लिए आदेश दिए हों। वहीं इस मामले में जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता मोहित चक से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने आरसी को लेकर कोई जवाब नहीं दिया।
