7. शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की राय पार्टी की राय नहीं हो सकती. इसके लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी से चर्चा कर निर्णय लिये जाने की उम्मीद है
8. शिवसेना पार्टी प्रमुख के पास किसी भी नेता को निष्कासित करने की कोई शक्ति नहीं है
9. दावा किया जा रहा है कि शिवसेना पार्टी प्रमुख का पद 2018 में बनाया गया था. लेकिन शिवसेना प्रमुख अहम पद था. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 19 में से 14 सदस्य प्रतिनिधि सभा से चुने जाने थे जबकि 5 को शिवसेना प्रमुख नियुक्त किया जाना था। 2018 के पार्टी ढांचे में किए गए बदलाव शिवसेना के संविधान के अनुरूप नहीं हैं.
राहुल नार्वेकर के फैसले के महत्वपूर्ण बिंदु-
1. 34 याचिकाओं को 6 समूहों में बांटा गया है। याचिका संख्या 18 तीसरे ग्रुप में है. चौथे समूह में याचिका संख्या 19 शामिल है। इसमें WHIP के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. पांचवें समूह पर बहुमत के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने का आरोप है।
2. मैं सुप्रीम कोर्ट का पूरा सम्मान करते हुए फैसला दे रहा हूं।’
3. 2018 में पार्टी संविधान में किए गए बदलावों को लेकर दोनों गुट अलग-अलग दावे कर रहे हैं. इसलिए मैं चुनाव आयोग से संविधान का आधार ले रहा हूं.’
4. 21 और 23 जून 2022 शिंदे गुट के पत्र विधानमंडल सचिवालय में हैं. आज के दिन एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना है.
5. 21 जून 2022 को विधानमंडल सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार, एकनाथ शिंदे गुट बहुमत दिखा रहा है। इसलिए, ऐसा प्रतीत होता है कि उस दिन एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना पार्टी थी.
6. व्हिप के रूप में भरत गोगावेले का निर्वाचन वैध है. ग्रुप लीडर के तौर पर एकनाथ शिंदे की नियुक्ति भी वैध है
Shiv Sena MLAs' disqualification case | Maharashtra Assembly speaker Rahul Narwekar says, "Shinde faction was the real Shiv Sena political party when rival factions emerged on 21st June 2022." pic.twitter.com/ap02jTodPl
— ANI (@ANI) January 10, 2024
7. शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की राय पार्टी की राय नहीं हो सकती. इसके लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी से चर्चा कर निर्णय लिये जाने की उम्मीद है
8. शिवसेना पार्टी प्रमुख के पास किसी भी नेता को निष्कासित करने की कोई शक्ति नहीं है
9. दावा किया जा रहा है कि शिवसेना पार्टी प्रमुख का पद 2018 में बनाया गया था. लेकिन शिवसेना प्रमुख अहम पद था. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 19 में से 14 सदस्य प्रतिनिधि सभा से चुने जाने थे जबकि 5 को शिवसेना प्रमुख नियुक्त किया जाना था। 2018 के पार्टी ढांचे में किए गए बदलाव शिवसेना के संविधान के अनुरूप नहीं हैं.
