यवतमाल: एक तरफ मराठा समाज को आरक्षण दिलाने के लिए मनोज जरांगे पाटिल भूख हड़ताल पर हैं। वहीं दूसरी तरफ मराठा आरक्षण को लेकर राज्य में चिंगारी भड़क उठी है। कई गांवों में नेताओं, मंत्रियों और विधायकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। राजनेता जहां भी जा रहे हैं मराठा समाज के प्रदर्शनकारी वहां जाकर उनका विरोध कर रहे हैं। मराठा आरक्षण का मुद्दा तूल पकड़ते देख और अगले साल चुनाव के मद्देनजर मराठा आरक्षण के लिए विभिन्न जिलों में कई पार्टी के पदाधिकारियों ने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
वहीं कुछ विधायकों ने मराठा आरक्षण का समर्थन कर राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। इन सबके बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए एकनाथ शिंदे गुट के सांसदों ने भी अपने सांसदी से इस्तीफा देना शुरू किया है। हिंगोली लोकसभा क्षेत्र से सांसद हेमंत पाटिल ने मराठा समाज के आंदोलन को समर्थन देने के लिए अपनी सांसदी से इस्तीफा दे दिया है।
हिंगोली और नांदेड़ में अच्छा जनसंपर्क
हेमंत पाटिल ने नांदेड़ जिले में अपना काम शिवसेना के माध्यम से शुरू किया था । पाटिल का हिंगोली और नांदेड़ दोनों जिलों में अच्छा जनसंपर्क है। इन दोनों जिलों में उन्हें हेमंत भाऊ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने शिवसेना के टिकट पर हिंगोली सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। हालांकि, सत्ता परिवर्तन होते ही उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले हेमंत पाटिल ने एकनाथ शिंदे के साथ जाने का फैसला किया था। पाटिल के इस फैसले से उस समय कई लोगों की भौंहें भी तन गईं थीं।
डीन से साफ करवाई थी टॉयलेट
हेमंत पाटिल ने हाल में नांदेड़ के अस्पताल में हुए हादसे के बाद शंकरराव चव्हाण सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल से टॉयलेट साफ करने को कहा था। इसके बाद वह पाटिल राज्य में चर्चा में आ गए थे। दरअसल मराठा समाज के आरक्षण की मांग को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों ने सांसद हेमंत पाटिल से मुलाकात की थी।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सांसद अपनी सांसदी से इस्तीफा दें। उनकी मांग पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए सांसद हेमंत पाटिल ने लोकसभा अध्यक्ष को अपने लेटरहेड पर अपना इस्तीफा लिखकर आंदोलनकारियों को सौंप दिया।
मैं मराठा आरक्षण आंदोलन का समर्थन करता हूं
सांसद हेमंत पाटिल ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि महाराष्ट्र में मराठा समाज के लिए आरक्षण का मुद्दा कई वर्षों से लंबित है। इसको लेकर मराठा समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं।
मैं मराठा समुदाय के लिए और किसानों के हित के लिए कई वर्षों से लड़ रहा हूं। इसलिए मैं मराठा समाज के आरक्षण आंदोलन का समर्थन करता हूं। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि मैं आरक्षण की मांग को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
