मुंबई: मायानगरी मुंबई में फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियां अवैध लॉटरी का कारोबार चला रही हैं। जिसमें स्किल 11, ग्रीन 11, डॉट 11 जैसी कंपनियां शामिल हैं। कई बार इन अवैध लॉटरी के अड्डों पर कारवाई भी हुई है लेकिन लॉटरी के इन अवैध कारोबारियों के अंदर मुंबई पुलिस का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। इस वजह से गरीब इंसान इन अवैध लॉटरी के कारोबारियों के चुंगल आसानी से फंसकर अपनी मेहनत की कमाई को लुटाकर घर लौट रहा है। इन अवैध लॉटरी कारोबारियों की वजह से महाराष्ट्र सरकार की तिजोरी पर भी खासा असर पड़ रहा है।
लीड न्यूज टुडे के हाथ मुंबई के मालाड ईस्ट इलाके में मौजूद एक अवैध लॉटरी सेंटर का वीडियो लगा है। जिसमें साफ दिखाई पड़ रहा है कि दुकान के बाहर एक पर्दा लगा हुआ है। जैसे ही आप इसके अंदर दाखिल होते हैं तो पता चलता है कि यहां लॉटरी का अवैध धंदा शुरू है। यहां खेलने वाले और खिलाने वाले दोनों मौजूद हैं।
धड़ल्ले से चल रहे अवैध लॉटरी सेंटर
जानकारी जुटाने पर यह पता चला कि मालाड ईस्ट इलाके में ऐसे कई अवैध लॉटरी सेंटर बेखौफ होकर धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन जगहों से लोकल पुलिस की पेट्रोलिंग टीम रोजाना गुजरती है। बावजूद इसके ये अवैध लॉटरी सेंटर बदस्तूर चलाए जा रहे हैं। अब सवाल ये है कि क्या इनपर पुलिस महकमे की नजर अभी तक नहीं गई है या फिर इन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। इस मामले में स्थानीय दिंडोशी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, लोकल डीसीपी से बात करने की कोशिश की लेकिन किसी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
सीपी ने दिए थे अवैध लॉटरी सेंटर बंद कराने के आदेश
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर संजय पांडे ने पदभार ग्रहण के बाद इन अवैध लॉटरी कारोबारियों पर नकेल कसने के फरमान सुनाया था। उसका कुछ असर भी दिखाई पड़ा था। हालांकि, उनके जाने के बाद ये लॉटरी सेंटर भी एक्टिव हो गए हैं।
ऐसे चलता है कारोबार
लॉटरी के अवैध कारोबार को चलाने के लिए ऑनलाइन ऐप तैयार किए गए हैं। इसी ऐप से इस गोरख धंधे को बढ़ाया जा रहा है। कस्टमर जैसे ही इस ऐप की लॉटरी खरीदता है उसको ऑपरेट करने वाले अपने रिकार्ड में देखते हैं कि सब से कम कौन से नंबर को लोगों ने खरीदा है। वह उसी कम नंबर की लॉटरी को खोलते हैं। इस प्रकार से जो अधिक खरीदने वाले लोग होते हैं उनके हाथ कुछ नहीं लगता है। और उनका पूरा पैसा अवैध लॉटरी का गोरख धंधा करने वालों की जेब में जाता है।
