मुंबई: देशभर में गणेशोत्सव की धूम के बीच आज डेढ़ दिन के गणपति बप्पा का विसर्जन किया जा रहा है। भक्त भारी उत्साह और भक्ति भाव के साथ अपने घरों से बप्पा को विदाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणेशोत्सव का रंग हमेशा खास होता है। यहां स्वागत से लेकर विसर्जन तक हर जगह आस्था और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
बीएमसी की बड़ी जिम्मेदारी
गणेश विसर्जन के दौरान सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है मुंबई महानगर पालिका (BMC) की। इस बार मार्वे बीच पर बीएमसी ने विशेष इंतज़ाम किए। भारी बारिश और समुद्री लहरों के बावजूद बीएमसी अधिकारी खुद मैदान में उतरे और भक्तों की सुविधा सुनिश्चित की।
असिस्टेंट कमिश्नर कुंदन वलवी और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मंदार चौधरी अपनी पूरी टीम के साथ बीच पर मौजूद रहे। उनकी कोशिश यही रही कि भक्तों को विसर्जन के दौरान किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।
हाईकोर्ट का आदेश और चुनौती
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया है कि 6 फीट से बड़ी मूर्तियों का विसर्जन समुद्र या तालाब में किया जाए, जबकि 6 फीट से छोटी मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाब में किया जाए। इसी कारण बीएमसी को कई जगह कृत्रिम तालाब तैयार करने पड़े। चुनौती यह रही कि कई भक्त परंपरागत रूप से अपने बप्पा का विसर्जन मार्वे बीच पर ही करना चाहते थे। ऐसे में उन्हें समझाना और कृत्रिम तालाब का प्रबंध करना बीएमसी के लिए मुश्किल काम था।
भक्तों के लिए खास इंतज़ाम
मार्वे बीच पर लाइटिंग, सुरक्षा, मेडिकल सुविधा और कृत्रिम तालाब की व्यवस्था की गई। भारी बारिश और लहरों के बीच भी बीएमसी की टीम लगातार सक्रिय रही। भक्तों ने बीएमसी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि “बारिश में भी बप्पा का विसर्जन सुरक्षित और व्यवस्थित रहा।”
गणेशोत्सव का जादू
मुंबई में गणेशोत्सव सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक है। डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन से ही उत्सव की असली रौनक शुरू होती है, जो आने वाले दिनों में ढोल-ताशों, नृत्य और ‘बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजेगी।
