नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में चल रहे शीतकालीन सत्र के बीच राजनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट के नेता आदित्य ठाकरे के एक बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में खलबली मचा दी है। आदित्य ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे खेमे के 22 विधायक बीजेपी में आने को तैयार हैं, जिससे नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति भी अटकी हुई है।उनके बयान के सामने आते ही पूरे सत्र का माहौल गर्म हो गया और आरोप–प्रत्यारोप की राजनीति चरम पर पहुंच गई।
22 विधायक BJP में जाने को तैयार
नागपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति टाल रही है, जबकि शिंदे गुट में असंतोष चरम पर है। उन्होंने सवाल उठाया, ‘सरकार नेता प्रतिपक्ष से क्यों डर रही है? क्या कारण है कि 22 विधायक अवसर तलाश रहे हैं?’ आदित्य के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।
पहले अपने 20 विधायक संभालो
आदित्य के दावे के बाद शिंदे गुट ने तुरंत पलटवार किया। मंत्री संजय शिरसाठ ने तीखे अंदाज़ में कहा, ‘आदित्य ठाकरे पहले अपने 20 विधायक बचा लें, दूसरों के बारे में बाद में सोचें।’ शिरसाठ ने आदित्य पर राजनीतिक असुरक्षा और झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
आदित्य अब ज्योतिषी बन गए हैं?
बीजेपी नेता निलेश राणे ने भी आदित्य के बयान पर तंज कसते हुए कहा, ‘क्या आदित्य ठाकरे अब ज्योतिषी बन गए हैं? जो उन्हें पता चल रहा है कि कौन कहां जाने वाला है?’
‘कह देने से कुछ नहीं होता’
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आदित्य के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ कह देने से कुछ नहीं होता। शिंदे सेना हमारा मित्र दल है। न तोड़ने की जरूरत है, न कोई जाने वाला है।’ फडणवीस ने आदित्य पर अनावश्यक भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
नागपुर में राजनीतिक तापमान उफान पर
आदित्य ठाकरे के दावे और सत्ता पक्ष की ताबड़तोड़ प्रतिक्रियाओं ने नागपुर सत्र को और भी राजनीतिक रूप से गर्म बना दिया है। जहां एक तरफ शिवसेना (यूबीटी) लगातार शिंदे गुट पर हमलावर है, वहीं बीजेपी और शिंदे सेना विपक्ष को भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है।
इस विवाद ने न सिर्फ राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है, बल्कि सत्र के दौरान आगे और कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम होने की आशंका भी बढ़ा दी है।
