नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि नीट, जेईई मेन, सीयूईटी व यूजीसी नेट जैसी देश की महत्वपूर्ण प्रवेश व भर्ती परीक्षाएं कराने वाला नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) एक प्राइवेट सोसाइटी है और यह आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आता। भारत सरकार के प्रेस सूचना कार्यालय ने इस खबर का खंडन किया है। सरकार की फैक्ट चैक ऑर्गेनाइजेशन पीआईबी फैक्ट चैक ( PIB Fact Check ) ने इस वायरल मैसेज को पूरी तरह फेक करार दिया है। पीआईबी फैक्ट चैक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर रहा, ‘यह दावा किया जा रहा है कि एनटीए एक निजी संगठन है और यह आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत नहीं आता है। यह दावा फर्जी है। एनटीए आरटीआई के दायरे में है। एनटीए के डीजी और इसकी गवर्निंग बॉडी की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती है।’
पीआईबी फैक्ट चैक के अगले ट्वीट में कहा गया – ‘ एनटीए भारत सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। एनटीए एक अलग कानूनी इकाई है और इसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया है।’
वायरल ट्वीट में क्या कहा जा रहा है
एक्स पर वायरल हो रहे ट्वीट में कहा जा रहा है – ‘यह जानकर आश्चर्य हुआ कि एनटीए एक प्राइवेट सोसायटी है जो सरकारी पैसे से चल रहे इंस्टीट्यूट्स में दाखिला लेना चाह रहे विद्यार्थियों के भविष्य का निर्णय ले रहा है। ये आरटीआई (सूचना का अधिकार कानून) के अंतर्गत आता है या नहीं, ये भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि न इसकी प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं न इसकी जवाबदेही है। इसी कारण केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय इस घोटाले से पाक साफ निकल सकता है।’
नीट पेपर लीक विवाद के चलते एनटीए सवालों के घेरे में
गौरतलब है कि यूजीसी नेट व नीट पेपर लीक विवाद के चलते एनटीए अपनी पारदर्शिता और कामकाज के तौर तरीके को लेकर सवालों के घेरे में है। एनटीए को भंग करने की मांग की जा रही है। तेज होते विरोध को देखते हुए सरकार ने सुबोध कुमार सिंह को एनटीए के महानिदेशक के पद से हटा दिया गया है और प्रदीप सिंह खरोला को एनटीए का महानिदेशक नियुक्ति किया गया है।
