राजस्थान: बीजेपी ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अभी तक पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। बावजूद इसके वह राजस्थान बीजेपी के नेताओं से से काफी आगे हैं। वसुंधरा राजे के कट्टर समर्थक या तो घर बैठे हैं या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वसुंधरा राजे के समर्थकों को टिकट नहीं दिया फिर भी वसुंधरा राजे सबसे आगे ही एनजेआर आ रही हैं। हालांकि, राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि बड़े पैमाने पर वसुंधरा राजे समर्थकों के टिकट रद्द कर दिए गए हैं। फिर भी 200 में से 70-80 उम्मीदवार वसुंधरा राजे के समर्थक माने जाते हैं।
ऐसे में अगर विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी को बहुमत मिलता है तो जाहिर तौर पर जीतने वाला उम्मीदवार वसुंधरा राजे का समर्थन करेगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस हो या बीजेपी, विधायकों की राय पर ही पार्टी आलाकमान मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
राजस्थान में बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री चुनना आसान नहीं
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव आता है तो सबसे आगे वसुंधरा राजे होंगी। ऐसे में बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री चुनना आसान नहीं होगा। पूरी संभावना है कि चुनाव के बाद भी वसुंधरा राजे समर्थक विधायक सत्ता में बने रहेंगे। ऐसे में अगर बीजेपी में विधायकों पर विचार किया जाए तो वसुंधरा राजे का नाम सबसे आगे हो सकता है। इन दिनों वसुंधरा राजे अपने समर्थकों के समर्थन में वोट मांग रही हैं।
इन तीन कारणों से वसुंधरा राजे हैं सबसे आगे
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वसुंधरा राजे तीन कारणों से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से आगे हैं। पहला बीजेपी में उनके जैसा कोई कद्दावर नेता नहीं है। दूसरा समाज के सभी वर्गों पर राजे की मजबूत पकड़। तीसरा वसुंधरा राजे सिंधिया परिवार से ताल्लुक रखती हैं। अंतिम समय में बाजी पलटने की क्षमता वसुंधरा राजे के पास है। वसुंधरा राजे ने जालरापाटन से अपनी उम्मीदवारी दाखिल करते हुए कहा, ‘मैं संन्यास नहीं लूंगी.’ जनसेवा करती रहूँगी।
बीजेपी में मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस
इस बार राजस्थान में बीजेपी बिना चेहरे के चुनाव लड़ रही है। फिलहाल, वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। इससे पहले दो चुनाव तो वसुंधरा राजे के नाम पर ही लड़े गए थे। इस बार का चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही लड़ा जा रहा है। वसुंधरा राजे के धुर विरोधी माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कह रहे हैं कि चुनाव के बाद संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री पद पर फैसला होगा। शेखावत खुद मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। हालांकि, वे इससे इनकार कर रहे हैं।
ऐसे में चुनाव के बाद बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री पद चुनना मुश्किल काम हो सकता है। फिलहाल बीजेपी में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दीया कुमारी और महंत बालकनाथ का नाम चर्चा में है। हालांकि बाबा बालकनाथ ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में वसुंधरा राजे को भावी मुख्यमंत्री बताकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। क्योंकि बालकनाथ को भी सीएम का चेहरा माना जाता है।
सर्वे में गहलोत के बाद वसुंधरा राजे आगे
राजस्थान विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद को लेकर अब तक आए सभी ओपिनियन पोल सामने आ चुके हैं। इनमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद दूसरे नंबर पर वसुंधरा राजे हैं। यानी बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद वसुंधरा राजे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि वसुंधरा राजे को नजरअंदाज करना बीजेपी आलाकमान को महंगा पड़ सकता है। हालांकि, राजस्थान में बीजेपी के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
