लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन अब आख़िरी मोड़ पर है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर नामांकन के साथ ही काफी हद तक विराम लग गया है। मौजूदा संकेत साफ़ बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश बीजेपी के अगले प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे हैं और उनका चयन लगभग तय माना जा रहा है।
नामांकन ने बदली सियासी तस्वीर
बीजेपी की ओर से तय कार्यक्रम के तहत लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी की गई। सबसे अहम बात यह रही कि पंकज चौधरी ने आधिकारिक रूप से नामांकन दाख़िल किया, और उनके प्रस्तावकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समर्थन केवल औपचारिक नहीं, बल्कि संगठन और सरकार दोनों की साझा सहमति का संकेत है।
प्रदेश अध्यक्ष की रेस में कौन-कौन था?
पिछले कुछ हफ्तों से यूपी बीजेपी अध्यक्ष को लेकर कई नाम चर्चा में थे—
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पंकज चौधरी – महाराजगंज सांसद, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री, पूर्वांचल से मजबूत ओबीसी चेहरा
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बी.एल. वर्मा – केंद्रीय मंत्री, संगठनात्मक अनुभव के लिए जाने जाते हैं
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स्वतंत्रदेव सिंह – पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी संगठन में गहरी पकड़
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साध्वी निरंजन ज्योति – केंद्रीय मंत्री रह चुकीं, पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व
लेकिन नामांकन के दिन आते-आते तस्वीर साफ होती चली गई और बाकी नाम स्वतः ही बैकफुट पर जाते दिखे।
पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर
पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अनुभवी और जमीनी चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में की और बाद में डिप्टी मेयर भी रहे। वर्ष 1991 में पहली बार महाराजगंज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए, जिसके बाद 1996, 1998, 2004, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज करते हुए वे सात बार लोकसभा सांसद बन चुके हैं।
पूर्वांचल में मजबूत पकड़ रखने वाले पंकज चौधरी वर्तमान में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं और बजट, आर्थिक नीतियों व संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। सरल छवि, संगठनात्मक अनुभव और ओबीसी (कुर्मी) समुदाय के प्रभावशाली प्रतिनिधि होने के कारण उन्हें पार्टी नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है, यही वजह है कि यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा है।
पंकज चौधरी क्यों बने सबसे मजबूत दावेदार?
1️⃣ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन
पंकज चौधरी पूर्वांचल से आते हैं और कुर्मी/ओबीसी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। यूपी जैसे राज्य में यह समीकरण चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
2️⃣ सरकार और संगठन के बीच भरोसे का सेतु
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खुला समर्थन यह दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसा प्रदेश अध्यक्ष चाहता है जो सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बना सके।
3️⃣ केंद्रीय नेतृत्व की स्वीकार्यता
केंद्रीय मंत्री होने के कारण पंकज चौधरी का सीधा संवाद शीर्ष नेतृत्व से है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को ऐसे ही चेहरे की ज़रूरत मानी जा रही है।
चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग गणित
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में लगभग 464 मतदाता शामिल होते हैं, जिनमें सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिला अध्यक्ष और पार्टी पदाधिकारी शामिल हैं। यदि एक ही वैध नामांकन रहता है, तो चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रह जाती है और सर्वसम्मति से नाम की घोषणा कर दी जाती है।
नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी के सामने कई अहम जिम्मेदारियाँ होंगी—
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2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करना
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बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करना
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सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को ज़मीन तक पहुँचाना
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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक धार तेज करना
नामांकन, नेतृत्व का समर्थन और संगठनात्मक संकेत तीनों मिलकर साफ़ संदेश दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश बीजेपी को जल्द ही नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है और वह नाम पंकज चौधरी का ही होगा। अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बीजेपी 2027 की सियासी जंग के लिए यूपी में किस नेतृत्व और रणनीति के साथ आगे बढ़ने जा रही है।
