कानपुर: उत्तर प्रदेश की औद्दोगिक राजधानी कानपुर शहर (Kanpur City) की सड़कों की बदहाली बारिश आते ही दिखाई देने लगी है। आईआईटी गेट से लेकर अनवरगंज रेलवे स्टेशन तक मेरे स्कूटी के सफर में आज मैं कई बार मौत के मुंह में जाते जाते बचा, आलम यह है कि अगर आपकी नजर सड़क से हटी तो समझो दुर्घटना घटी। कल्यानपुर, गुरुदेव मेट्रो स्टेशन, दलहन संस्थान, रावतपुर क्रॉसिंग समेत कई जगहों पर यह समझ में ही नहीं आता कि सड़क पर गढ्ढे हैं या फिर गढ्ढे में सड़क है। शहर की इस रोड को जीटी रोड (GT Road) के नाम से जाना जाता है, जो कानपुर को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ती है।
अब इन्हीं गढ्ढों से नागरिक अपनी जान हथेली पर लेकर गुजरने को मजबूर हैं। बाइक, कार, ऑटोरिक्शा और बस, सब इन जानलेवा गढ्ढों से गुजर रहे हैं। अगर इन मौत बांटने वाले गढ्ढों को जल्द नहीं भरा गया तो नागरिकों की जान भी जा सकती है।
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हलांकि, सवाल ये भी है कि क्या शहर के जिम्मेदार लोग इस सड़क का इस्तेमाल नहीं करते होंगे, क्या उन्हें जनता की तकलीफें नहीं दिखाई देतीं, आखिर क्यों, शासन-प्रशासन ने अपनी आँखें मूँद रखी हैं। क्या जबतक कोई नागरिक हादसे का शिकार नहीं होगा तबतक इनकी नींद नहीं टूटेगी
