मुंबई। मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘भैया जी’ इस शुक्रवार 24 मई को रिलीज हो चुकी है। दूसरी ओर वह हिट वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ के तीसरे सीजन की शूटिंग में बिजी हैं। मनोज बाजपेयी ‘फैमिली मैन’ बनकर हर दर्शक के दिल में जगह बना चुके हैं। लेकिन पत्नी शबाना नहीं चाहती थीं कि वह ‘द फैमिली मैन’ करें। वह इसके खिलाफ थीं, और यह खुलासा खुद एक्टर ने किया है।
मनोज बाजपेयी ने कहा, ‘जब मैं पहला सीजन कर रहा था, तो मेरी पत्नी ने चिंता से पूछा कि क्या सब ठीक है? तुम सीरीज क्यों कर रही हैं? मैंने उनसे कहा कि शबाना, यह (ओटीटी और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म) अमेरिका में एक बड़ी बात है, और यह यहां भी पीक पर पहुंचेगा। लेकिन शबाना समझ नहीं पाईं।
आज मनोरंजन के लिए हमारे पास कितना कुछ है। फिल्में हैं, टीवी है, ओटीटी से लेकर सोशल मीडिया की दुनिया है। लेकिन नब्बे का दशक ऐसा था, जब हर घर में टीवी का बोलबाला था। यह वह दौर था, जब पूरा परिवार एकसाथ बैठकर टीवी पर ‘रामायण’ से लेकर ‘महाभारत’ देखता था। चित्रहार’ और रंगोली जैसे शोज में गाने सुनकर झूमता था। दूरदर्शन तब एकमात्र चैनल था और उसकी पॉपुलैरिटी चरम पर थी। इसी दौर में टीवी पर एक ऐसा शो भी आया, जिसने देश की अलग-अलग संस्कृतियों को एकजुट करने का काम किया। 34 साल पहले दूरदर्शन पर आए इस शो का नाम था सुरभि जिसे रेणुका शहाणे और सिद्धार्थ काक अपनी मीठी मुस्कान के साथ होस्ट करते थे। इस शो की पॉपुलैरिटी का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इसे देखने वाले दर्शक हर हफ्ते रेणुका और सिद्धार्थ को 14 लाख से अधिक चिट्ठियां भेजते थे।
सुरभि के निर्माता इसके को-होस्ट सिद्धार्थ काक ही थे। इस शो का थीम भारतीय संस्कृति था। जहां दर्शकों को देश की अलग-अलग खूबियों और अचरच भरी चीजों के बारे में बताया जाता था। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों की भेजी चिट्ठियां पढ़ी जाती थीं और उनके जनरल नॉलेज के सवालों का जवाब दिया जाता था। 1990 से 2001 तक (1991 को छोड़कर) यह शो 10 साल चला और इसके 415 एपिसोड्स प्रसारित हुए।
सुरभि देश में सबसे लंबे समय तक प्रसारित होने वाला कल्चरल टीवी शो रहा है। इसकी पॉपुलैरिटी का एक बड़ा कारण इसमें दर्शकों की भागीदारी थी, जहां उनके सवालों का जवाब दिया जाता था। उस समय देश में मोबाइल फोन और इंटरनेट का चलन नहीं था। ऐसे में दर्शक भारतीय डाक से 15 पैसे वाले पोस्टकार्ड के जरिए अपने सवाल भेजते थे। एक ही सप्ताह में 14 लाख से अधिक पोस्ट कार्ड मिलने के कारण इस शो का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल है।
सुरभि के लिए पोस्टकार्ड भेजने का चलन इस कदर बढ़ गया था कि भारतीय डाक विभाग इससे परेशान हो गया। मजबूरी में विभाग ने 15 पैसे के पोस्टकार्ड की जगह 2 रुपये की कीमत पर एक कंपीटिशन पोस्टकार्ड जारी किया। ताकि ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सेदारी के लिए लोग उसी का इस्तेमाल करें। कीमत बढ़ाने के पीछे कारण यही था कि इस तरह पोस्टकार्ड भेजने वालों की संख्या कम होगी।
हाल ही सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ काक ने उन सुनहरे दिनों को याद किया है। वह कहते हैं, ‘हमारी रिसर्च टीम कैमरे के पीछे नहीं थी, बल्कि कैमरे के सामने थी। देश ही हमारी रिसर्च टीम थी, क्योंकि लोग आपको वह सब कुछ बता रहे थे जो आप जानना चाहते थे। आप बस पूछें और वे आपको बता देंगे। हमने कभी नहीं सोचा था कि शो को ऐसा रेस्पॉन्स मिलेगा।
सिद्धार्थ काक बताते हैं कि जब शो शुरू हुआ तो पहले कुछ महीनों में हफ्ते में 4 से 5, कभी 10-15 और फिर 100 से 200 चिट्ठियां मिल जाती थीं। लेकिन चार-पांच महीनों में ही यह संख्या बढ़कर पांच हजार तक पहुंच गई। इतनी ज्यादा चिट्ठियां आने लगीं कि उन्हें मैनेज करना मुश्किल होने लगा। हर चिट्ठी को खोलना और पढ़ना मुश्किल था, इसलिए दर्शकों से पोस्टकार्ड भेजने की अपील की गई।
