Pune Hooch Tragedy: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में सामने आए पुणे जहरीली शराब कांड ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया है। Pune Hooch Tragedy में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस और राज्य उत्पाद शुल्क (एक्साइज) विभाग के अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है।
अब तक पुलिस और एक्साइज विभाग के कुल 21 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं पूरे मामले की जांच CID को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में Methanol Poisoning को मौतों की मुख्य वजह माना जा रहा है।
पुलिस विभाग पर बड़ी कार्रवाई
जहरीली शराब कांड में कर्तव्य पालन में लापरवाही और गंभीर चूक के आरोपों के बाद पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय ने दापोडी पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक विजय वाघमारे को निलंबित कर दिया है। उनके साथ जांच टीम के प्रभारी समेत चार अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है।
इससे पहले हड़पसर क्षेत्र में हुई मौतों के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका था। वहीं अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक नरेंद्र ठाकरे का तबादला कर उन्हें पुलिस कंट्रोल रूम भेज दिया गया है।
पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों को गंभीर मानते हुए यह कार्रवाई की है।
एक्साइज विभाग के 13 अधिकारी निलंबित
Pune Illegal Liquor Case में राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें 3 इंस्पेक्टर, 6 सब-इंस्पेक्टर और 4 अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ।
मेथनॉल बनी मौत की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब में मेथनॉल मिलाया गया था। Methanol Poisoning Pune Case की जांच कर रही एजेंसियों का मानना है कि इसी जहरीले रसायन के कारण लोगों की मौत हुई।
मामले में कई लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है। पुलिस और एक्साइज विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
CID करेगी पूरे नेटवर्क की जांच
महाराष्ट्र सरकार ने पूरे Pune Hooch Tragedy मामले की जांच CID को सौंप दी है। जांच एजेंसियां अब पुणे शहर, पुणे ग्रामीण और पिंपरी-चिंचवड़ में फैले अवैध शराब नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
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जांच का फोकस इस बात पर है कि मेथनॉल कहां से आया, जहरीली शराब किसने तैयार की, उसका वितरण कैसे हुआ और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
हड़पसर में शिवसेना का हल्लाबोल
जहरीली शराब कांड के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। हड़पसर विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना ने अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाया।
शिवसेना पुणे शहर प्रमुख प्रमोद नाना भानगिरे के नेतृत्व में शिवसैनिकों ने कृष्णानगर, तरवडे वस्ती और साठे वस्ती इलाके में कथित अवैध शराब भट्टियों पर कार्रवाई की। इस दौरान सैकड़ों लीटर नकली देशी शराब नष्ट की गई और कई अवैध भट्टियों को तोड़ा गया।
भानगिरे ने आरोप लगाया कि अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से खुलेआम चल रहा था और संबंधित एजेंसियां समय रहते कार्रवाई करने में विफल रहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों को अवैध शराब के ठिकानों की जानकारी थी, तो प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
पुणे जहरीली शराब कांड में 15 लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। पुलिस और एक्साइज विभाग के अधिकारियों पर हुई कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
अब पूरे राज्य की नजर CID जांच पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि जांच के दौरान अवैध शराब कारोबार, मेथनॉल सप्लाई चेन और कथित संरक्षण तंत्र से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
