मुंबई| महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग में लिपिक-टंकलेखक (क्लर्क-टाइपिस्ट) की नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 70 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को ठाणे क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 (भिवंडी) ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर, नकली सरकारी मुहरें, लेटरहेड, फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र बरामद किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, भिवंडी के काल्हेर गांव निवासी दर्शन संतोष पाटील (28) को आरोपी शाम विठोबा खतकर और उसके साथियों ने सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। आरोपियों ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगे दस्तावेज दिखाकर विश्वास जीत लिया।
इसके बाद आरोपियों ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और नकद भुगतान के जरिए पीड़ित से करीब 70 लाख रुपये वसूल लिए। बदले में उसे राजस्व एवं वन विभाग में लिपिक-टंकलेखक पद का फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र सौंप दिया।
ऐसे खुला ठगी का राज
कुछ समय बाद जब पीड़ित को नियुक्ति प्रक्रिया पर संदेह हुआ तो उसने जांच की। तब उसे पता चला कि उसके साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उसने नारपोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाणे क्राइम ब्रांच यूनिट-2 (भिवंडी) ने जांच शुरू की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी शाम विठोबा खतकर के खिलाफ मुंबई के एमएचबी, काशीमीरा, कोपरी, दादर और कफ परेड पुलिस थानों में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के कई मामले दर्ज हैं।
वहीं, अन्य आरोपी जुगल लोडाया और रविंद्र शंखुआ के खिलाफ भी वर्तकनगर और हिंगोली में इसी तरह के अपराध दर्ज हैं।
पुलिस की कार्रवाई
यह कार्रवाई ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे, पुलिस सह आयुक्त डॉ. पंजाबराव उगले तथा अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शीतल राऊत और उनकी टीम ने की।
