मुंबई: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने एक बयान की वजह से सुर्खियों और विवाद दोनों में आ गए हैं। दरअसल उन्होंने यह कहा है कि अगर समर्थ रामदास न होते तो शिवाजी, छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं बन पाते। गुजरात में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उनके द्वारा दिए गए इस बयान से अब एक नया विवाद छिड़ने की पूरी आशंका है। कार्यक्रम में बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने बयान दिया कि शिवाजी बनाने की फैक्ट्री के सभी योग्य गुरु यहीं बैठे हैं। अब इस घटना का वीडियो सामने आ गया है और इससे राज्य में सियासी माहौल गरमाने की आशंका है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान के बाद संभाजी ब्रिगेड के प्रवक्ता डॉ. शिवानंद भानुसे ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह विवाद जानबूझकर खड़ा किया जाता है। क्योंकि बाबासाहेब पुरंद्रे ने यह मुद्दा उठाया था और बाद में उन्होंने माफी मांगी थी।
तो फिर शिवाजी महाराज रामदास को कैसे भूल गए?
आगे बोलते हुए भानुसे ने कहा कि हमारे पास उन लोगों के लिए सीधा और सरल प्रश्न हैं जो कहते हैं कि वे गुरु हैं। पहला प्रश्न यह है कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था तो 18 देशों से लोग आए थे। उस समय रामदास जीवित थे। अगर वे गुरु थे तो फिर शिवाजी महाराज रामदास को कैसे भूल गए?
दूसरा प्रश्न यह है कि यदि रामदास शिवराय (शिवाजी) का राज्याभिषेक करने के लिए वहां थे तो गागभट्ट को क्यों बुलाया गया? तीसरा प्रश्न यदि रामदास गुरु थे तो जब ब्राह्मणों ने राज्याभिषेक का विरोध किया तो रामदास ने उनका विरोध क्यों नहीं किया? रामदास कहां थे? शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में उनका उल्लेख तक नहीं है।
रामदास और शिवराय की मुलाकात का कोई सबूत नहीं
भानुसे ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रामदास और शिवराय की मुलाकात हुई थी। हालांकि, एक पत्र मिला है जिसमें मठ के लिए दान मांगने के लिए उनके आने का जिक्र है। इसलिए, भानुसे ने कहा कि इतिहास ने साबित कर दिया है कि रामदास, शिवाजी महाराज के गुरु नहीं थे।
