मुंबई: राहुल गांधी ने वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया लेकिन उन्होंने यह साफ नहीं किया है कि वह अमेठी से चुनाव लड़ेंगे या नहीं। साल 2019 में राहुल ने अमेठी और वायनाड दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। तब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने अमेठी से हरा दिया था। यह पहली बार नहीं है कि कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ रहा है। इससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) ने वाराणसी और वडोदरा दोनों लोकसभा सीटों (Loksabha Seats) से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की थी।
1957 में ने तीन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था। जनसंघ ने उन्हें लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से मैदान में उतारा था। वह लखनऊ से हार गए थे और मथुरा में जमानत जब्त हो गई थी। लेकिन वह बलरामपुर से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। ऐसे में यह सवाल पैदा होता है कि वास्तव में एक उम्मीदवार कितनी सीटों पर चुनाव लड़ सकता है और इसके नियम क्या हैं?
एक उम्मीदवार कितनी सीटों पर चुनाव लड़ सकता है?
सुप्रीम कोर्ट के वकील जाने माने वकील आशीष पांडे ने कहा कि रिप्रेझेंटेशन ऑफ द एक्ट 1951 की धारा 33 (7) में कोई भी उम्मीदवार अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है। तो फिर सवाल उठता है कि 1957 में अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन सीटों से चुनाव कैसे लड़ा? दरअसल 1951 के बाद राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के कई सीटों से चुनाव लड़ने के कई मामले सामने आए। इसके कई कारण थे।
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अक्सर ऐसे उदाहरण सामने आते हैं कि उम्मीदवार वोट खाने (काटने) के लिए खड़े हो जाते हैं। कई प्रभावशाली लोगों को मैदान में उतारकर अधिक से अधिक सीटें हासिल करने के लिए ऐसा किया जाता था। ऐसा 1996 तक होता रहा। बाद में इस प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा संशोधित किया गया और सीटों की संख्या कम कर दी गई। अब नए नियमों के मुताबिक एक उम्मीदवार दो से ज्यादा सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकता।
यदि आप दोनों सीटें जीत गए तो क्या होगा?
कई सीटों पर चुनाव लड़ना और प्रचार करना समय और धन की बर्बादी हो सकती है। क्योंकि अगर कोई उम्मीदवार दो सीटों पर भी चुनाव लड़ता है तो उसे एक सीट छोड़नी होती है। इसलिए उस सीट पर फिर से चुनाव लड़वाना पड़ता है। इससे सरकारी मशीनरी पर दबाव पड़ता है और एक्स्ट्रा पैसे भी खर्च होते हैं। साल 2014 में वडोदरा और वाराणसी दोनों जगहों से चुनाव लड़ने के बाद मोदी ने वाराणसी से सांसद बनने के लिए वडोदरा सीट छोड़ दी थी। इसलिए वडोदरा में उपचुनाव कराना पड़ा था।
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सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी। इसमें मांग की गई कि उम्मीदवारों को एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया था कि दो चुनावों के कारण बाद में होने वाले उपचुनावों का खर्च सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
