मुंबई: महाराष्ट्र सरकार जैन समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी पहल करने जा रही है। राज्य सरकार 1 नवंबर 2026 से जैन अल्पसंख्यक विकास आर्थिक महामंडल के माध्यम से तीन कर्ज योजनाओं की शुरुआत करेगी। योजना के पहले चरण में 511 लाभार्थियों को कुल 51 करोड़ रुपये के कर्ज और मंजूरी पत्र दिए जाएंगे। इसमें महिलाओं, विद्यार्थियों और स्वरोजगार एवं व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को लाभ मिलेगा।
दो साल पहले हुआ था स्वतंत्र जैन महामंडल का गठन
जैन समाज के धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने दो साल पहले देश के पहले स्वतंत्र जैन अल्पसंख्यक विकास आर्थिक महामंडल की स्थापना की थी। अब इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सरकार समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा, स्वरोजगार और व्यवसाय के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जा रही है।
तीन योजनाओं के जरिए मिलेगा आर्थिक लाभ
इस पहल के तहत तीन अलग-अलग योजनाएं शुरू की जा रही हैं। महासती चंदनबाला महिला स्वयंरोजगार कर्ज योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, कर्मवीर भाऊराव पाटील उच्च शिक्षण कर्ज योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक के कर्ज की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, सेठ वालचंद हीराचंद स्वरोजगार कर्ज योजना के तहत व्यवसाय और उद्योग शुरू करने के इच्छुक पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।
पहले चरण में 511 लाभार्थियों को मिलेगा लाभ
इन तीनों योजनाओं के माध्यम से पहले चरण में 511 लाभार्थियों को कुल 51 करोड़ रुपये के कर्ज और कर्ज मंजूरी पत्र वितरित करने की योजना है। इससे जैन समाज के जरूरतमंद विद्यार्थियों, महिलाओं और युवाओं को शिक्षा, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
घाटकोपर में होगा योजना का शुभारंभ
योजना का शुभारंभ 1 नवंबर 2026 को मुंबई के घाटकोपर स्थित पुलिस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित राज्य सरकार के कई मंत्रियों तथा विभिन्न महामंडलों और आयोगों के पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी है।
जैन अल्पसंख्यक विकास आर्थिक महामंडल के चेयरमैन एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त ललित गांधी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। महाराष्ट्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य जैन समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और शिक्षा एवं रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।
