Thursday, April 16, 2026
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Maratha Reservation: एकनाथ शिंदे सरकार को 2 जनवरी की डेडलाइन, भूख हड़ताल खत्म करने के पहले क्या बोले मनोज जरांगे पाटिल?

मुंबई: मराठा आरक्षण के लिए आरक्षण पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने हमसे समय मांगा, कोई बात नहीं। इन्हें कुछ समय दीजिए, हमने 40 साल दिए हैं थोड़ा समय और सही। हालांकि, आरक्षण हासिल करने का यह आंदोलन नहीं रुकेगा। पाटिल ने कहा कि आप समय लीजिए लेकिन हमें आरक्षण दीजिए। जरांगे पाटिल ने स्पष्ट किया इस बार सरकार को दी गई मोहलत आखिरी होगी। पाटिल ने कहा कि इस बार हम एकनाथ शिंदे सरकार को 2 जनवरी तक का समय दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल अपनी भूख हड़ताल छोड़ रहे हैं। इस तरह से नौ दिनों के बाद मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल ख़त्म हो गई है।

जरांगे पाटिल ने कहा कि सरकार मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए तैयार है। यह विशेष रूप से महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए है। यदि आंशिक आरक्षण का निर्णय हुआ होता तो हमारा एक भाई परेशान होता और दूसरा खुश होता। सबकी दिवाली मधुर हो। मेरा यह मत नहीं है कि एक मीठा है और दूसरा कड़वा है। इसलिए पूरे महाराष्ट्र के लिए काम करें। यदि आप समय लेना चाहते हैं तो ले लीजिए।

जरांगे पाटिल को दो पूर्व न्यायधीशों ने समझाया

सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम. जे गायकवाड़ और सुनील शुक्रे ने अंतरवली सराटी जाकर मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात की। इस मौके पर उद्योग मंत्री उदय सामंत, धनंजय मुंडे समेत अन्य नेता मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल को कानूनी पहलुओं के बारे में बताया गया। हम ओबीसी के आरक्षण से समझौता किए बिना मराठा समुदाय को आरक्षण देना चाहते हैं। इसके लिए मराठा समुदाय के पिछड़ेपन को निर्धारित करने के मानदंडों को पूरा किया जा रहा है। उनका काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसलिए हमें कुछ समय और दीजिए। उन्होंने कहा कि समस्या एक-दो दिन में हल नहीं होती। हम मराठा समुदाय को अलग से आरक्षण देने जा रहे हैं। इसलिए थोड़ा वक्त दीजिए।

सबूत तो सबूत होता है

सरकार की तरफ से कहा गया कि हमको जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला अदालत में टिक नहीं पाएगा। इसलिए हमको कोर्ट के सामने ठोस आधार लेकर जाना होगा। इसलिए हम कई स्तरों पर काम कर रहे हैं। हम इम्पीरिकल डेटा तैयार कर रहे हैं। इसलिए अतिरिक्त समय चाहिए। सेवानिवृत्त जज ने यह भी बताया कि एक से दो महीने में पूरा डेटा इकट्ठा कर लिया जाएगा। जिसपर जरांगे पाटिल ने कहा कि फिर मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र क्यों नहीं दिया जाता? एक प्रमाण क्या है और हजार प्रमाण क्या है? उससे क्या फर्क पड़ता है? सबूत तो सबूत होता है। इसलिए आरक्षण दीजिए। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वे खून के रिश्ते वाले व्यक्ति को ही कुनबी प्रमाणपत्र देंगे।

नया आयोग बनाया जाएगा

दोनों न्यायाधीशों ने जरांगे पाटिल से कहा कि कोर्ट आपके पक्ष में फैसला करेगा। पिछड़े मराठों को आरक्षण जरूर मिलेगा, हम डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। एक से दो महीने में यह काम पूरा हो जायेगा। इससे पता चलेगा कि कुल कितने प्रतिशत मराठा पिछड़े हैं। मराठा पिछड़े नहीं होते, ऐसी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने की है। मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए एक नया आयोग नियुक्त किया जाएगा। रिटायर जज ने जरांगे पाटिल से कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई कर रहे हैं।

मांगें लिख ली गईं

इस बीच, सेवानिवृत्त जज ने जरांगे पाटिल की मांगों को लिख लिया। जरांगे पाटिल ने जज से चार-पांच अहम मांगें की हैं। जिन्हें वैसा ही लिख दिया गया। जरांगे पाटिल ने मांग की है कि मराठा समाज को आरक्षण दिया जाए। सर्वेक्षण के लिए आयोग को जनशक्ति प्रदान की जाए। सुविधाएं और वित्तीय प्रावधान उपलब्ध कराए जाएं। सर्वेक्षण के लिए एक से अधिक संस्थान आने चाहिए।

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