मुंबई: शिवसेना विधायक अयोग्यता फैसले के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (Rahul Narwekar) आज से एनसीपी विधायक अयोग्यता मामले (NCP MLA Disqualification Case) की सुनवाई कर रहे हैं. एनसीपी विधायक अयोग्यता की सुनवाई का आज पहला दिन था. सुनवाई के पहले दिन एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार गुट (Sharad Pawar Faction) के विधायक जितेंद्र आव्हाड की दोबारा गवाही दर्ज करने का काम शुरू हुआ. शुरुआत में शरद पवार गुट के वकीलों ने जितेंद्र आव्हाड से सवाल जवाब किया. इसके बाद अजित पवार गुट (Ajit Pawar Faction) के वकीलों ने सवाल जवाब किया. इस दौरान जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने बड़ा खुलासा किया. आव्हाड ने जो बात कही उससे शरद पवार के हाथ से कहीं एनसीपी न निकल जाए. यह सवाल उठ खड़ा हुआ है.
हमने शिवसेना विधायक अयोग्यता का मामला (Shivsena MLA Disqualification Case) देखा है. शिवसेना को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला भी देखा है. अदालत के फैसले में इस बात का जिक्र था कि उद्धव ठाकरे बहुमत परीक्षण का सामना नहीं किया. अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की सरकार वैसे ही बहाल हो जाती. उस समय के हालात को देखते हुए अदालत ने तत्कालीन राज्यपाल को फटकार लगाते हुए कहा था कि राज्यपाल द्वारा बहुमत परीक्षण के लिए दिया गया आदेश गलत था. लेकिन इस मामले में उद्धव ठाकरे का इस्तीफा एक बड़ी गलती साबित हुई. इसलिए विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों का सम्मान किया और उनकी बात सुनकर फैसला देने का आदेश दिया.
अजित पवार गुट का आरोप
अब एनसीपी के मामले में कुछ चीजें अलग हैं. शरद पवार अभी जीवित हैं. हालांकि, उपमुख्यमंत्री अजित पवार गुट के वकीलों ने चुनाव आयोग की सुनवाई के दौरान आरोप लगाया है कि शरद पवार पार्टी में मनमानी करते थे. अजित पवार गुट का आरोप है कि वे आंतरिक चुनाव कराए बिना ही नियुक्तियां कर देते थे. इस मामले की सुनवाई चुनाव आयोग कर रहा है. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के सामने भी सुनवाई चल रही है. इसलिए एनसीपी का मामला शिवसेना की सुनवाई से कुछ अलग है.
जितेंद्र आव्हाड से कौन सा सवाल पूछा गया?
शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सुनवाई के दौरान यह पूछा गया कि क्या पार्टी के आंतरिक चुनाव हुए थे? इस मामले में आव्हाड ने जो जवाब दिया वह काफी महत्वपूर्ण है. शायद इस मुद्दे से अजित पवार गुट को फायदा होने की संभावना है. आव्हाड ने दावा किया है कि पार्टी के आंतरिक चुनाव के दस्तावेज गायब हो गए हैं.
आव्हाड ने कहा कि पार्टी के अंदर चुनाव हुए थे लेकिन यह दस्तावेज़ गोपनीय कोठरी में रखे गए थे. जिन दो लोगों को इन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई थी. वो सभी लोग पार्टी छोड़ चुके हैं. मुझे नहीं पता कि उन्होंने इन दस्तावेजों यानी सबूतों का क्या हुआ. इसका मतलब यह है कि शरद पवार गुट के पास पार्टी के भीतर चुनाव के सबूत नहीं हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस गलती से पार्टी और पार्टी का नाम शरद पवार के हाथ से चला जायेगा?
