नई दिल्ली: एनसीपी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग में अहम सुनवाई हुई। इस सुनवाई के दौरान एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के वकील देवदत्त कामत ने दलीलें पेश की। जब सुनवाई खत्म होने वाली थी तो शरद पवार के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड चुनाव आयोग के दफ्तर से बाहर आए। उन्होंने मीडिया को बताया कि इस बार की सुनवाई में क्या हुआ? उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद प्रफुल्ल पटेल ने पिछले 20 वर्षों में कभी भी शरद पवार के बारे में शिकायत नहीं की। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब पार्टी में पहले कोई विवाद नहीं था तो ऐसी सुनवाई नहीं हो सकती।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी 1999 से 2018 तक बनी रही, सर्वसम्मति से चली, तब तक कोई नहीं बोला। अब 2023 में पहली बार ऐसा आरोप लगा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में अजित पवार खुद थे। वह खुद (अजित पवार) समर्थन कर रहे थे। हमने 20 तारीख तक पार्टी के हलफनामे में कोई मुद्दा नहीं लिया है, कोई विवाद नहीं था। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग के अनुच्छेद 15 के अनुसार किसी भी विवाद की सुनवाई उसी प्रकार नहीं की जा सकती जिस प्रकार तब सुनी जाती थी जब पार्टी में कोई विवाद न हो। हमने इसके लिए कानूनी सबूत उपलब्ध कराए हैं।
अजित पवार ने शरद पवार को अध्यक्ष पद के लिए मंजूरी दी थी
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वकील देवदत्त कामत ने आज हमारा मामला पेश किया। अजित पवार गुट में चीजें गड़बड़ा गईं। शरद पवार ने 1999 से पार्टी की स्थापना की और उसे बढ़ाया। उन पर 20 वर्षों में कभी आरोप नहीं लगाया गया। पहली बार 2023 में आरोप लगे कि 2018 के बाद से हुए चुनावों में धांधली हुई है।
पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन ग़लत था। ये आरोप प्रफुल्ल पटेल, अजित पवार की ओर से लगाए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन दोनों नेताओं ने शरद पवार को पार्टी के अध्यक्ष के रूप में मंजूरी दी थी। जबकि 30 जून 2023 को उन्होंने कहा कि पार्टी में फूट है।
‘हम अजित पवार गुट को बेनकाब कर रहे हैं’
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमारी स्पष्ट राय है कि एनसीपी 1 और 2 अचानक कैसे हुई? उन्होंने पहले कभी शिकायत नहीं की। शरद पवार के अध्यक्ष पद को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ। असल में कोई पूर्व विवाद नहीं है उन्होंने केवल अपने स्वार्थ के लिए निर्णय लिया है। आज की सुनवाई में हमने कुछ संदर्भ दिये हैं।
इसमें साफ किया गया है कि अगर पार्टी में पहले से ही विवाद हैं तो दो गुटों पर विचार किया जाएगा। लेकिन एनसीपी के साथ ऐसा नहीं हुआ है। अचानक विवाद खड़ा किया गया है। हम अजित पवार गुट को बेनकाब करने के लिए काम कर रहे हैं।
विवाद पार्टी को लेकर नहीं सत्ता को लेकर है: जितेंद्र आव्हाड़
वहीं शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र आव्हाड़ ने कहा कि हमारे केस में ब्रह्मानंद रेड्डी बनाम इंदिरा गांधी के मामले का संदर्भ दिया गया है। विवाद अचानक नहीं होते इसकी एक पृष्ठभूमि होती है लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। साल 1999 के बाद हमारी पार्टी कैसे आगे बढ़ी, इसकी जानकारी दी गयी। साल 2020 में कोरोना के कारण उस समय कोई पार्टी चुनाव नहीं हुआ था लेकिन फिर बाद में चुनाव हुआ।
पति-पत्नी को भी रातों-रात तलाक नहीं मिलता, इसमें समय भी लगता है। तो यहां यह कैसे संभव है कि एक ही दिन में एनसीपी में विवाद हो गया? असल में विवाद पार्टी का नहीं बल्कि सत्ता का है। शरद पवार ने कड़ी मेहनत से पार्टी बनाई है।
