मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में पर्दे के पीछे कई सियासी घटनाक्रम हो रहे हैं। फ़िलहाल नागपुर में विधानमंडल का शीतकालीन चल रहा है। इस शीतकालीन सत्र के दौरान एनसीपी विधायक रोहित पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर नई भविष्यवाणी की है। साथ ही कांग्रेस विधायक कैलास गोरंट्याल ने भी एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा दावा किया है। दोनों विधायकों के दावों के मुताबिक महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा भूकंप आने की आशंका है। चर्चा है कि शिवसेना विधायक अयोग्यता की सुनवाई का नतीजा एकनाथ शिंदे के खिलाफ आ सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष संविधान के मुताबिक फैसला लेते हैं तो नतीजा उद्धव ठाकरे गुट के पक्ष में होगा।
विधानमंडल में हो रहे सीएसी घटनाक्रम पर कैलास गोरंट्याल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधानसभा सत्र साल का आखिरी सत्र है। जल्द ही एकनाथ शिंदे अयोग्य करार दिये जायेंगे। इसलिए विधानमंडल में विधायकों का फोटो सेशन हुआ है। जल्द ही उपमुख्यमंत्री अजित पवार या देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इसके लिए विधायकों ने अपनी तरफ से लॉबिंग भी शुरू कर दी है। इसीलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-दूसरे पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा 10 दिन बढ़ा दी
विपक्ष की ओर से जहां ये तमाम आरोप प्रत्यारोप चल रहे हैं। वहीं आज एक और अहम खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को शिवसेना विधायक अयोग्यता मामले की सुनवाई के लिए 31 दिसंबर की समय सीमा दी थी। इसके मुताबिक राहुल नार्वेकर सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में दोनों पक्षों की बहस लगभग पूरी हो चुकी है। अब सुनवाई अंतिम चरण में है। इस बीच, राहुल नार्वेकर फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और समय सीमा तीन सप्ताह बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शिवसेना विधायक अयोग्यता मामले पर फैसला 20 दिसंबर को सुरक्षित रखा जाएगा। लेकिन मुझे 2 लाख से ज्यादा दस्तावेज मिले हैं। उन्हें पढ़ना होगा और फैसला भी लिखना होगा। कोर्ट के समक्ष विधानसभा अध्यक्ष ने अपने आवेदन में कहा था कि तीन सप्ताह का समय बढ़ाया जाये। कोर्ट ने उनकी मांग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए तीन हफ्ते का समय नहीं बढ़ाया लेकिन 10 दिन की मोहलत जरूर दे दी है। ऐसे में राहुल नार्वेकर को थोड़ी राहत मिली है।
एकनाथ शिंदे की किस्मत का फैसला 10 जनवरी को होगा
इन सब के बीच सियासी गलियारे में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर जोरदार चर्चा शुरू है। एकनाथ शिंदे की पूरी किस्मत इस सुनवाई के नतीजे पर निर्भर करती है। अगर ये नतीजा एकनाथ शिंदे के पक्ष में गया तो उद्धव ठाकरे को बड़ा नुकसान होगा। लेकिन अगर ये नतीजा उद्धव ठाकरे के पक्ष में जाता है तो सबसे ज्यादा नुकसान एकनाथ शिंदे को होगा। इस नतीजे के चलते एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ सकता है। 10 जनवरी को एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे या जायेंगे? यह स्पष्ट होगा।
