मुंबई: महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर मुंबई में एक सकारात्मक सामाजिक पहल देखने को मिली। संतोष आर.एन. सिंह के नेतृत्व में उत्तर भारतीय संघ ने जरूरतमंद मराठी महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित कीं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहयोग देना और समाज में आपसी सौहार्द को मजबूत करना है।
मराठी भाषा महाराष्ट्र की आत्मा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष सिंह ने कहा कि मराठी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने उत्तर भारतीय समाज को सम्मान और रोजगार के अवसर दिए हैं, जिसके लिए वे खुद को आभारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को कुछ लौटाने की भावना से यह पहल की जा रही है, ताकि जरूरतमंद महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
महिलाओं के स्वावलंबन पर जोर
इस कार्यक्रम के तहत कई जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें दी गईं, जिससे वे घर से ही रोजगार शुरू कर सकें। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक प्रयास मानी जा रही है। संतोष सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे अपने परिवार की आय में योगदान दे सकें।
मराठी सीखने के लिए विशेष पहल
मराठी भाषा को लेकर चल रही चर्चा के बीच उत्तर भारतीय संघ ने एक और अहम फैसला लिया है। संगठन अपने संस्थानों में मराठी सीखने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा, ताकि महाराष्ट्र में रहने वाले लोग स्थानीय भाषा से बेहतर तरीके से जुड़ सकें। संतोष सिंह ने कहा कि मराठी सीखने से आपसी संबंध मजबूत होते हैं और समाज में अपनापन बढ़ता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि देश की हर भाषा का सम्मान होना चाहिए और भाषा को लेकर किसी तरह का टकराव नहीं होना चाहिए। मराठी सीखना एक सकारात्मक पहल है, जो समाज को जोड़ने का काम कर सकती है।
सौहार्द और सहयोग की पहल
इस कार्यक्रम के जरिए उत्तर भारतीय संघ ने यह संदेश देने की कोशिश की कि समाज में सहयोग, सम्मान और एकजुटता ही सबसे महत्वपूर्ण है। संतोष सिंह ने अंत में कहा, ‘जय महाराष्ट्र’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि दिल से निकली भावना है।’
