राजकोट/मुंबई। एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने विश्व शांति को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मानवता को युद्ध, हिंसा और विनाश से बचाना है तो भगवान बुद्ध के बताए रास्ते पर चलना होगा।
राजकोट में बोधिसत्व आंबेडकर बुद्ध विहार के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए आठवले ने कहा कि भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और अहिंसा का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था। उन्होंने कहा कि बुद्ध का विचार केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग है।
युद्ध केवल विनाश लाता है
अपने संबोधन में रामदास आठवले ने कहा कि इतिहास गवाह है कि युद्ध कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन पाया। युद्ध से केवल जनहानि, हिंसा और तबाही बढ़ती है। इसकी सबसे बड़ी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया के कई देशों में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध का अहिंसा और शांति का संदेश पूरी दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।
बुद्ध का दर्शन मानवता को जोड़ता है
आठवले ने कहा कि बुद्ध तत्वज्ञान लोगों को जोड़ने, सह-अस्तित्व और भाईचारे की सीख देता है। यही वजह है कि बुद्ध के विचार किसी एक देश, समाज या धर्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि विश्व समुदाय बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश को अपनाए, तो युद्ध और हिंसा जैसी स्थितियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
राजकोट में हुआ बोधिसत्व आंबेडकर बुद्ध विहार का लोकार्पण
राजकोट में नव निर्मित बोधिसत्व आंबेडकर बुद्ध विहार का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के हाथों संपन्न हुआ। बताया गया कि वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु वीरत्न भंते की लंबे समय से इच्छा थी कि इस विहार का उद्घाटन आठवले के हाथों हो।
इस अवसर पर विहार में स्थापित भगवान बुद्ध के स्तूप की आकर्षक प्रतिकृति भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और बौद्ध अनुयायियों ने हिस्सा लिया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में बोधगया के महाबोधि महाविहार ट्रस्ट के सदस्य भंते आनंद महाथेरो, आरपीआई गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार भट्टी, प्रभारी जतीन भुट्टा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बुद्ध के संदेश की अहमियत
अपने संबोधन के अंत में रामदास आठवले ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भगवान बुद्ध का शांति और अहिंसा का संदेश पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने लोगों से बुद्ध के विचारों को जीवन में अपनाने और समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।
