मुंबई: हर गुजरते दिन के साथ अब लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं. इसलिए महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ी हलचल देखने मिल रही है. इसके चलते संभावित उम्मीदवारों के बीच रस्साकशी शुरू हो गई है. ऐसी ही स्थिति पुणे लोकसभा चुनाव (pune Lok Sabha Election News) में दिख रही है. पिछले दो सालों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है. इसका असर आगामी लोकसभा चुनाव (लोकसभा चुनाव 2024) पर पड़ेगा. पुणे, बारामती, मावल और शिरूर लोकसभा सीटों पर किस पार्टी से किसे उम्मीदवारी मिलेगी? यह बड़ा सवाल बना हुआ है। ऐसा लग रहा है कि इन चार लोकसभा सीटों में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए रस्साकसी चल रही है। हालांकि, प्रत्याशियों के बीच खींचतान से पार्टी नेताओं का सिरदर्द बढ़ गया है.
बारामती सीट पर सुप्रिया सुले के खिलाफ कौन? (Baramati Lok Sabha constituency)
बारामती लोकसभा सीट पर इस वर्ष पूरे देश की निगाहें रहेंगी. क्योंकि, शरद पवार से अलग होकर अजित पवार ने अलग मोर्चा खोल दिया है. मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले को एनसीपी (शरद पवार समूह) से उम्मीदवारी दी जाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन अजित पवार ने यह भी टिप्पणी की कि बारामती से महागठबंधन का उम्मीदवार चुना जाएगा.
इसलिए सुप्रिया सुले के खिलाफ कौन सा उम्मीदवार मैदान में उतरेगा? ये देखना दिलचस्प होगा. दरसल बीजेपी इस सीट पर कई बार चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उसे हमेशा निराशा ही हाथ लगी है. हालांकि, उस समय एनसीपी एकजुट थी, अब स्थिति बदल गई है. इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव बहुत रोचक होने वाले हैं.
बारामती लोकसभा सीट में क्या होगा?
तो इस साल बारामती लोकसभा सीट में क्या होगा? इस पर राज्य का ध्यान गया है. साल 2019 के चुनाव में सुप्रिया सुले ने बीजेपी की कंचन कुल को हराया. लेकिन इस बार स्थिति अलग है. अजित पवार ने शरद पवार से दूरी बना ली है और बीजेपी के करीब हैं. बारामती सीट पर महागठबंधन का उम्मीदवार तय करने में अजित पवार की बड़ी भूमिका रहने वाली है.
शिरूर लोकसभा सीट पर अमोल कोल्हे और शिवाजीराव आढळराव के बीच फिर से मुकाबला (Shirur Lok Sabha constituency)
बारामती के अलावा शिरूर लोकसभा सीट भी चर्चा में है. शरद पवार गुट से अमोल कोल्हे को दोबारा उम्मीदवारी मिलने की संभावना है. वहीं एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना शिवाजीराव आढळराव को चाहता है. 2014 में वह इसी सीट से शिवसेना से सांसद थे. शिवसेना में फूट के बाद आढळराव ने एकनाथ शिंदे के साथ जाने का फैसला किया. इसलिए अमोल कोल्हे को महाविकास अघाड़ी से उम्मीदवारी दी जाएगी या फिर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) यहां उम्मीदवार उतारने की मांग कर सकती है.
मावल में रस्साकशी, पार्थ पवार की हार से बचाएंगे अजित पवार? (Maval Lok Sabha constituency)
मावल लोकसभा क्षेत्र में भी बड़ी उथलपुथल नजर आ रही है. साल 2019 के चुनाव में श्रीरंग बार्ने ने अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को हराया था. श्रीरंग बारणे मौजूदा सांसद हैं, वह एकनाथ शिंदे की शिवसेना में हैं. महागठबंधन में किसे मिलेगी यह सीट? ऐसे में यह सीट एकनाथ शिंदे या अजित पवार गुट किसको मिलेगी यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है. वहीं अजित पवार की योजना पार्थ पवार की हार का बदला लेने की भी होगी.
फिलहाल पुणे लोकसभा ( Pune Lok Sabha constituency) क्षेत्र में कोई सांसद नहीं है. 2019 में बीजेपी से चुने गए गिरीश बापट का असामयिक निधन हो गया. यहां कोई उपचुनाव नहीं हुआ. इसलिए, पुणे निर्वाचन क्षेत्र में वर्तमान में कोई सांसद नहीं है.
लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव में हमें इस संसदीय क्षेत्र में बड़ी हलचल देखने मिलेगी. बीजेपी से दावेदारों की कतार लगी हुई है. सुनील देवधर, मुरलीधर मोहोल, जगदीश मुलिक और गिरीश बापट की बहु लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं. कांग्रेस से मोहन जोशी इच्छुक हैं. पुणे पहले कांग्रेस का गढ़ था, लेकिन अब यहां बीजेपी का दबदबा हो गया है. कांग्रेस से अनंत गाडगिल, अभय छाजेड़, गोपाल तिवारी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं.
