Monday, March 23, 2026
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यूएन की रिपोर्ट में दावा, 2060 के दशक के शुरु में 1.7 अरब तक पहुंच जाएगी भारत की जनसंख्या

संयुक्त राष्ट्र । संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत की जनसंख्या 2060 के दशक की शुरुआत में लगभग 1.7 अरब तक पहुंच जाने का अनुमान है और इसके बाद इसमें 12 प्रतिशत की कमी आएगी, लेकिन इसके बावजूद यह पूरी शताब्दी के दौरान विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा।

जारी ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2024’ रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 50-60 वर्षों के दौरान दुनिया की जनसंख्या में वृद्धि जारी रहने का अनुमान है और 2024 में यह 8.2 अरब तक पहुंच जाएगी, जबकि 2080 के दशक के मध्य तक लगभग दुनिया की आबादी लगभग 10.3 अरब हो जाएगी। हालांकि, चरम स्थिति पर पहुंचने के बाद वैश्विक जनसंख्या में धीरे-धीरे गिरावट आने का अनुमान है और यह सदी के अंत तक घटकर 10.2 अरब रह जाएगी। भारत पिछले साल चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया था और 2100 तक यह इसी स्थान पर बना रहेगा।

विश्व निकाय के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (डीईएसए) के जनसंख्या प्रभाग द्वारा प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में कहा गया है, ”इस शताब्दी में भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बने रहने की संभावना है, हालांकि 2060 के दशक की शुरुआत में इसकी आबादी लगभग 1.7 अरब तक पहुंचने के बाद इसमें 12 प्रतिशत की गिरावट आने का भी अनुमान है।’’

रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या 2024 में 1.45 अरब तक पहुंच सकती है। वहीं, 2054 में यह बढ़कर 1.69 अरब तक पहुंच जाएगी। इसके अनुसार, यह भी अनुमान है कि सदी के अंत तक 2100 में भारत की आबादी घटकर 1.5 अरब हो जाएगी, लेकिन इसके बावजूद यह दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बना रहेगा।

भारत की जनसंख्या के अनुमान पर ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए संयुक्त राष्ट्र डीईएसए के जनसंख्या प्रभाग की वरिष्ठ अधिकारी क्लेयर मेनोजी ने कहा, ”भारत वर्तमान में जनसंख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और पूरी शताब्दी में इसके शीर्ष पर ही बने रहने का अनुमान है। वर्तमान में भारत की जनसंख्या 1.45 अरब तक पहुंच सकती है और बाद में यह बढ़कर 1.69 अरब भी हो जाएगी। ’’

मेनोजी ने कहा, ”ऐसा माना जा रहा है कि 2060 के दशक के आसपास भारत की आबादी चरम पर होगी और फिर इसमें धीरे-धीरे कमी आनी शुरू हो जाएगी। ऐसे में सदी के अंत तक भारत की जनसंख्या लगभग 1.5 अरब हो जाएगी, लेकिन फिर भी यह दुनिया में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बना ही रहेगा।’’ रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की जनसंख्या वर्ष 2054 में घटकर 1.21 अरब तक पहुंच जाएगी। वर्तमान में चीन की आबादी 1.41 अरब है।

इसमें कहा गया, ”वर्तमान में चीन दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, लेकिन 2024 से लेकर 2054 के बीच इसकी जनसंख्या के घटने का अनुमान है, जो इस अंतराल में 20.4 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके अलावा जापान की आबादी 2.1 करोड़, रूस की आबादी एक करोड़ तक रह जाएगी। चीन में प्रजनन के निरंतर निम्न स्तर के कारण यहां सदी के अंत तक किसी भी देश की तुलना में जनसंख्या में सबसे अधिक गिरावट (78.6 करोड़) होने की संभावना है।

रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान में वैश्विक प्रजनन दर प्रति महिला 2.25 जीवित बच्चा है, जो 1990 के 3.31 जन्म से कम है। इसमें बताया गया कि पाकिस्तान की आबादी साल 2054 तक 38.9 करोड़ पहुंच जाएगी और इसी के साथ पाकिस्तान, अमेरिका को पीछे छोड़कर विश्व का तीसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा।

वर्तमान में अमेरिका दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और इसकी कुल जनसंख्या 34.5 करोड़ है। वहीं, 2054 में इसकी आबादी 38.4 करोड़ हो जाएगी और यह दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। वर्ष 2100 में 51.1 करोड़ की जनसंख्या के साथ पाकिस्तान विश्व का तीसरा सबसे बड़ा आबादी वाला देश बना रहेगा।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस शताब्दी में दुनिया की जनसंख्या के चरम पर पहुंचने की संभावना 80 प्रतिशत है, जबकि एक दशक पहले संयुक्त राष्ट्र ने इसकी संभावना केवल 30 प्रतिशत ही जताई थी। अब अनुमान है कि वर्ष 2100 में विश्व की जनसंख्या एक दशक पूर्व की अपेक्षा 6 प्रतिशत कम होगी या लगभग 70 करोड़ लोग कम होंगे।

संरा की रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 126 देशों और क्षेत्रों में जनसंख्या 2054 तक बढ़ती रहेगी तथा संभवतः सदी के अंत में या 2100 के बाद अपने चरम पर पहुंच जाएगी। इस समूह में विश्व के कई सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और अमेरिका शामिल हैं।

साल 2023 में, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की वैश्विक संख्या हाल के इतिहास में पहली बार पांच लाख से नीचे आ गई। हालांकि, ऐसी 95 प्रतिशत मौतें उन 126 देशों में हुई जिनकी आबादी अभी भी बढ़ रही है। इनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, भारत, नाइजीरिया और पाकिस्तान शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 2024 में 73.3 वर्ष तक पहुंच जाएगी, जो 1995 से 8.4 वर्ष की वृद्धि है।

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