मुंबई: एसी लोकल ट्रेन में टिकट चेकिंग के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने यात्रियों और रेलवे अधिकारियों को हैरान कर दिया। खुद को रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force) का जवान बताकर सफर कर रहे एक युवक की पहचान फर्जी निकली। आरोपी न सिर्फ बिना टिकट यात्रा कर रहा था, बल्कि उसने रेलवे कर्मचारी होने का दावा करते हुए पहचान पत्र भी दिखाया। हालांकि टिकट चेकिंग टीम की सतर्कता के चलते उसकी सच्चाई जल्द ही सामने आ गई।
टिकट चेकिंग के दौरान हुआ शक
मध्य रेल के अनुसार 8 जून 2026 की शाम मुंबई मंडल के मानखुर्द और वडाला रोड स्टेशनों के बीच चलने वाली एसी लोकल ट्रेन में नियमित टिकट जांच अभियान चल रहा था। इसी दौरान ट्रैवलिंग टिकट इंस्पेक्टर श्रद्धा सालुंखे और केतकी कदम ने एक यात्री से टिकट मांगा। यात्री ने खुद को आरपीएफ कर्मी बताते हुए पहचान पत्र दिखाया, लेकिन वह यात्रा के लिए कोई वैध प्राधिकरण नहीं दिखा सका। अधिकारियों को उसके पहचान पत्र और व्यवहार पर संदेह हुआ, जिसके बाद उससे विस्तार से पूछताछ की गई।
सवालों के जवाब नहीं दे पाया आरोपी
पूछताछ के दौरान जब उससे आरपीएफ सेवा और ड्यूटी से जुड़े कुछ सामान्य सवाल पूछे गए तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इससे टिकट चेकिंग टीम का संदेह और गहरा हो गया। पहचान पत्र की जांच और बातचीत के आधार पर अधिकारियों को यकीन हो गया कि युवक फर्जी तरीके से खुद को आरपीएफ कर्मी बता रहा है।
RPF और GRP के हवाले किया गया
जांच में संदेह पुख्ता होने के बाद आरोपी को तुरंत हिरासत में लिया गया। उसने अपना नाम एम. डी. मलंग बताया। इसके बाद उसे रेलवे सुरक्षा बल और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के हवाले कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
आरोपी के खिलाफ लोकमान्य तिलक टर्मिनस रेलवे पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र कैसे हासिल किया और क्या वह पहले भी इसी तरह सरकारी कर्मचारी बनकर लोगों को गुमराह कर चुका है।
मध्य रेल ने यात्रियों से की अपील
इस घटना के बाद Central Railway ने यात्रियों से सतर्क रहने की अपील की है। रेलवे प्रशासन ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी या सुरक्षा बल का सदस्य होने का झूठा दावा करना गंभीर अपराध है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को रेलवे या आरपीएफ का कर्मचारी बताता है और उसका व्यवहार संदिग्ध लगता है, तो इसकी सूचना तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139, नजदीकी आरपीएफ चौकी या ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारियों को दें।
टिकट चेकिंग से टला संभावित सुरक्षा खतरा
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि नियमित टिकट चेकिंग सिर्फ बिना टिकट यात्रा रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुरक्षा से जुड़े मामलों का भी खुलासा होता है। इस मामले में टिकट चेकिंग टीम की सतर्कता के कारण एक फर्जी आरपीएफ कर्मी का भंडाफोड़ हुआ और संभावित सुरक्षा जोखिम को समय रहते रोक लिया गया।
