मुंबई: फ़िलहाल देश में किसान आंदोलन और आरक्षण का मुद्दा चर्चा में है। राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा में लोगों को उनकी जाति पूछते हुए नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि मोदी राज में दलित और ओबीसी हाशिये पर हैं। इन सब के बीच देश भर में जाति के आधार पर रेजिमेंट बनाने की मांग उठने लगी है। कई वर्षों से चली आ रही अहीर रेजिमेंट के बाद अब ब्राह्मण समाज ने ब्राह्मण रेजिमेंट के गठन की मांग की है। इसको लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर #देश_मांगे_ब्राह्मण_रेजिमेंट हैशटैग के साथ ट्रेंड हो रहा है।
इसी साल जनवरी के महीने में ब्राह्मण खाप हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा था कि ब्राह्मण रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर एक लाख लोगों के हस्ताक्षर करवाये जाएंगे और हस्ताक्षर पत्र सरकार को सौंपे जाएंगे। इसके अलावा रेजिमेंट को लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
कब बनी थी ब्राह्मण रेजिमेंट?
सन 1776 में कप्तान टी नैलोर द्वारा बंगाल नेटिव इन्फेंट्री बटालियन के नाम से ब्राह्मण रेजिमेंट की स्थापना की गई थी। 1st ब्राह्मण रेजिमेंट ब्रिटिश आर्मी की इन्फेंट्री विंग से संबंधित थी। सेना में ब्राह्मण रेजिमेंट अपने युद्ध कौशल के लिए जानी जाती थी। पर 1st ब्राह्मण रेजीमेंट को अंग्रेजों द्वारा बंद कर दिया गया था।
ब्राह्मण रेजिमेंट का इतिहास क्या है?
ब्रिटिश काल में ब्राह्णण रेजिमेंट का गठन किया गया था, इसका भी रोचक इतिहास है। पहली ब्राह्मण रेजिमेंट की स्थापना १७७६ (1776) में हुई थी। इस रेजिमेंट में भूमिहार ब्राह्मण, मोहयाल ब्राह्मण और पंजाबी सारस्वत ब्राह्मण होते थे। इसके बाद बंगाल रेजिमेंट रक्षक की स्थापना हुइ थी। इसमें 90 % सैनिक भूमिहार ब्राह्मण थे जो पूर्वांचल के होते थे। ये आज भी अपने नाम के आगे सिंह लगाते हैं।
1942 में ब्राह्मण रेजिमेंट को बंद कर दिया गया और बंगाल रेजिमेंट में भी भूमिहार ब्राह्मणों की भर्ती पर रोक लगा दी गई। इसका कारण था 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ब्राह्मणों का महत्वपूर्ण योगदान। इसके अलावा साल 1942 में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान तथा प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सकरार के लिए लड़ने से मना कर देना।
आजादी के लिए लड़ाई और नेतृत्व में ब्राह्मण आगे
ब्रिटिश ये समझ चुके थे कि आजादी के लिए लड़ाई और नेतृत्व करने में ब्राह्मण ही सबसे आगे रहते हैं। 1857 में मंगल पांडेय का सैनिक छावनी में विद्रोह, नाना साहेब का लखनऊ और कानपुर की रियासत पर अधिकार, रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे का मराठा सैनिकों का नेतृत्व अंग्रेजों की नींव हिला चुका था। इसके साथ भारत रिपब्लिकन आर्मी के मुखिया पंडित चंद्रशेखर तिवारी (आज़ाद), बिस्मिल, राजगुरु, बी के दत्ता, वीर सावरकर आदि भी ब्राह्मण ही थे। इन लोगों ने ब्रिटिश सरकार को बहुत नुकसान पहुंचाया था।
इन सब आजादी के महान क्रांतिकारियों और ब्राह्मणों के बढ़ते योगदान को विचार करते हुए ब्रिटिश सरकार ने यह निर्णय लिया कि ये ब्राह्मणों की ब्रिटिश सेना में भर्ती उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है क्योंकि ये लोग कभी भी टुकड़ी का नेतृत्व और विद्रोह कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने ब्राह्मण रेजिमेंट बंद कर दी और बंगाल रेजिमेंट में भी ब्राह्मणों की भर्ती बंद कर दी। आजादी मिलने तक सेना में इसी परंपरा को कायम रखा गया और आज भी सेना में ब्राह्मण रेजिमेंट नहीं है। (साभार https://www.facebook.com/Jambudwip/)
बता दें कि उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में काफी समय से अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग की जा रही है। हालांकि, सरकार अभी तक जाति आधारित रेजिमेंट बनाने पर सहमत नहीं हुई है। बहरहाल ट्विटर पर ट्रेंड हो रहे कुछ ट्वीट आपके सामने पेश कर रहे हैं।
पुखराज बिश्नोई ने लिखा कि में इस माँग का पूर्ण समर्थन करता हु और आप…?
में इस माँग का पूर्ण समर्थन करता हु और आप…?@VoiceOfBrahmins#देश_मांगे_ब्राह्मण_रेजिमेंट pic.twitter.com/pKGgjybFyN
— PUKHRAJ BISHNOI (@PRGBishnoi) February 22, 2024
एक यूजर ने लिखा कि शेरे-ए-कारगिल जिन्होने कारगिल का पूरा खेल ही बदल दिया था कैप्टेन मनोज पांडे आज इस वीर योद्धा का समाज रेजीमेंट की मांग करता है।
#देश_मांगे_ब्राह्मण_रेजिमेंट
शेरे-ए-कारगिल जिन्होने कारगिल का पूरा खेल ही बदल दिया था कैप्टेन मनोज पांडे आज इस वीर योद्धा का समाज रेजीमेंट की मांग करता है।#देश_मांगे_ब्राह्मण_रेजिमेंट pic.twitter.com/ujJaiD36O7— छोटे_सरकार (@maalik_ji) February 22, 2024
