रामगढ़: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार किया गया हिंदू कोड बिल स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक ऐतिहासिक कानून था। इसी कानून ने महिलाओं को समान अधिकार और न्याय की मजबूत नींव प्रदान की।
झारखंड के रामगढ़ स्थित राधा गोविंद विश्वविद्यालय में आयोजित “डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के आर्थिक और श्रम संबंधी विचार” विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए आठवले ने कहा कि हिंदू कोड बिल के जरिए महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार, शिक्षा, रोजगार, उत्तराधिकार और कानूनी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अधिकार मिले।
उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने समाज में व्याप्त कई रूढ़ियों को चुनौती दी और महिलाओं के अधिकारों को कानूनी मान्यता दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
रामदास आठवले ने अपने संबोधन में डॉ. आंबेडकर के श्रमिक हितों के लिए किए गए योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रम मंत्री रहते हुए बाबासाहेब ने काम के घंटे 12 से घटाकर 8 घंटे किए और गर्भवती महिलाओं के लिए सवेतन मातृत्व अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आठवले ने कहा कि डॉ. आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय अर्थशास्त्री भी थे। उनकी पुस्तक “द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी” भारतीय आर्थिक चिंतन की महत्वपूर्ण कृति है और भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में भी उनके विचारों का प्रभाव माना जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जल संसाधन, बांध निर्माण, बिजली उत्पादन और नदी जोड़ो जैसी अवधारणाओं को आगे बढ़ाने में भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके दूरदर्शी विचारों ने आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संस्थापक बैजनाथ शाह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडे, कुलपति प्रो. रश्मी सिंह, महाकौशल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. मिश्रा सहित कई शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
