Thursday, June 4, 2026
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निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का देशव्यापी प्रदर्शन, CBI जांच की मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 42 जिलों में बिजली निजीकरण की प्रक्रिया खिलाफ नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर बुधवार को देश के सभी राज्यों में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदर्शन किया। अब 9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिती और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजिनीयर्स संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण निगमों में घाटे के भ्रामक आंकड़े देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लिया है।

लाखों करोड़ की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम बेचना की मंशा

इसके विरोध में बिजली कर्मी 7 माह से आंदोलन कर रहे हैं। आरोप लगाया गया कि पावर कॉर्पोरेशन और शासन के कुछ बड़े अधिकारियों की कुछ चुनिंदा निजी घरानों के साथ मिलीभगत है। ये लोग बिजली विभाग की लाखों करोड़ रुपए कीमत की परिसंपत्तियों को इन घरानों को कौड़ियों के दाम बेचना चाहते हैं। दावा किया गया कि बुधवार को देशभर में हुए आंदोलन में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने जिलों और परियोजनाओं पर लंच के दौरान प्रदर्शन किया।

लखनऊ के साथ त्रिवेंद्रम, विजयवाड़ा, चेन्नई, बेंगलुरू, मुंबई, रायपुर, भोपाल, वडोदरा, गुवाहाटी, शिलाँग, कोलकाता, भुवनेश्वर, पटना, रांची, श्रीनगर और जम्मू समेत अन्य जगहों प्रदर्शन किए गए। बिजली विभाग कर्मियों के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

उपभोक्ता परिषद ने की सीबीआई जांच की मांग

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने निजीकरण की प्रक्रिया के लिए मानक पर निकाली गई रिर्जव बिड प्राइस के मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल के 42 जनपदों को तोड़कर बनने वाली पांच नई बिजली कंपनियां गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, काशी, झांसी, आगरा और मथुरा की कुल मनिमम रिर्जव बिड प्राइस लगभग 6500 से 6800 रुपए आंकी गई। इस राशि को तय करने के लिए जो आधार लिया गया। उस आधार पर कहीं भी निजीकरण नहीं हुआ है।

आरोप है कि देश के बड़े निजी घरानों को लगभग 3500 करोड़ रुपए का फायदा पहुचांने की तैयारी की गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले में जल्दबाजी ना दिखाई जाए क्योंकि पावर कॉर्पोरेशन इस पर जल्द से जल्द दोबरा एर्नजी टास्क फोर्स की मंजूरी लेना चाहता है।

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