मुंबई: इन दिनों पूरे मीरा भायंदर शहर में एक स्वयं घोषित हिंदू शेरनी निर्दलीय विधायक गीता जैन की काफी चर्चा है। इसे समझने के लिए पहले आपको पूरी क्रोनोलॉजी को समझना पड़ेगा। दरअसल बीती 25 फरवरी 2024 को मीरा रोड में तेलंगाना के विधायक और हिंदूवादी फायर ब्रांड नेता टी. राजा की रैली आयोजित की गयी थी। विधायक टी. राजा अपने विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस रैली में टी.राजा ने हाई कोर्ट द्वारा लगाई गईं सभी शर्तों को नजरअंदाज करते हुए भड़काऊ भाषण दिया। जिसकी शिकायत एआईएमआईएम के पूर्व विधायक वारिस पठान और सांसद इम्तियाज जलील ने की है। यह सब कुछ तब हुआ जब कुछ दिन पहले ही मीरा रोड इलाके में दो समुदायों के बीच दंगे के हालात बने थे।
बहरहाल राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा के समय निकाली गयी रैली में रामभक्तो पर नयानगर इलाके में हुई हिंसा के चलते शहर में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस चिंतित थी। इसलिए 19 फ़रवरी को शिवाजी महाराज जयंती के मौके पर उनकी प्रस्तावित रैली और सभा को पुलिस प्रशासन ने इजाजत नहीं दी थी। हालांकि, बाद में कोर्ट के आदेश पर शर्तों के साथ उन्हें (टी राजा) सिर्फ रैली की परमिशन मिली। गौरतलब है की ये पूरा आयोजन सकल हिंदू समाज और अन्य हिंदू वादी संगठन ने किया था लेकिन अदालत के आदेश के बाद विधायक गीता जैन एक्टिव मोड में आ गईं और इस पूरे कार्यक्रम को हाईजैक करने में लग गईं।
टी. राजा के नाम पर भीड़ जुटाना आसान
हालांकि सूत्रों का कहना है की ये योजना उन्हीं की थी लेकिन पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने आयोजक मंडली को प्रायोजित कर दिया। जिसकी तस्दीक टी राजा ने अपने भाषण में कर भी दी। गीता जैन को इस बात का अंदाजा था कि टी. राजा के नाम पर भीड़ जुटाना आसान होगा। इसलिए उन्होंने अतिथि सत्कार के नाम पर खुद को प्रमोट किया और खुद को हिंदू शेरनी के रूप मे स्थापित करने की कोशिश करते हुए अपने बैनर पोस्टर भी शहर में लगवाए।
भाजपा एवं अन्य पार्टी नेताओं ने आयोजन से दूरी बनाई
जबकि शहर के कई लोगों का मानना था की जब शहर में शांतिपूर्ण माहौल है तो ऐसे में इस दौरे या कार्यक्रम की कोई आवश्यकता नहीं थी। मीरा भायंदर के सभी भाजपा एवं अन्य पार्टी के नेताओं ने भी इस रैली और आयोजन से दूरी बनायीं थी। शहर में यह बात भी सामने आई थी कि जिस तरीके से नया नगर में हुई हिंसा के बाद भाजपा नेता एड. रवि व्यास ने पीड़ितों के साथ खड़े होकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। जिससे उनकी तारीफ भी हुई थी।
वहीं पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने रहे और तिरंगा शांति यात्रा निकालकर अपनी राजनैतिक स्तिथि को सुधारने के असफल प्रयास में लगे रहे। इसी के चलते गीता जैन अपने आप को तथाकथित हिंदू शेरनी के रूप में स्थापित करने के प्रयास में लग गई हैं। टी राजा की रैली के जरिये गीता जैन ने इसको साधने का प्रयास किया।
टी राजा से बड़ी तस्वीर
यहाँ तक की रैली में ना सिर्फ उनकी तस्वीर टी राजा से बड़ी थी बल्कि उन्होंने अपना कद भी बड़ा दिखाने की पूरी कोशिश की। जिस तरह से टी राजा ने अपने सम्बोधन के दौरान गीता जैन की उपस्थिति में समुदाय विशेष के लिए जातिसूचक और लिंगवाचक शब्दों का इस्तेमाल किया। जिस तरह वो वहां खड़ी रहकर मुस्कुराती रहीं वो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुल मिलाकर निर्दलीय विधायक गीता जैन ने अपने कार्यकाल के दौरान जो काम किये है उसका विश्लेषण आम जनता कर रही है।
साथ ही वो भाजपा के साथ है या फिर शिवसेना के साथ ये भी अभी सस्पेंस बना हुआ है और इसलिए अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गीता जैन अब हिंदू शेरनी का चोला पहनकर अपनी राजनीति को चमकाने की कोशिश कर रही है। ये अलग बात है की जनता सब जानती है।
