Sharad Pawar: देश में पत्रकारों और पत्रकारिता को लेकर एनसीपी चीफ शरद पवार अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, ‘बदलते हालात में देश में मीडिया की स्थिति भी बदली है। पत्रकारों के लिए अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाने की गुंजाइश बहुत कम है। किसी के सुझाव के अनुसार नहीं लेकिन यदि कोई सही और निष्पक्ष पक्ष है तो सही पक्ष अवश्य प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वरिष्ठ नेता शरद पवार ने उम्मीद जताई कि पत्रकारों को आम आदमी की आवाज बनने के लिए काम करना चाहिए। मराठी अखबार सकाल एक कार्यक्रम में शरद पवार ने यह बात कही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि देश की सामाजिक स्थिति तेजी से बदल रही है। इसे वापस पुरानी स्थिति में लाने की चुनौती पत्रकारों के सामने है। यह सराहनीय है कि वॉयस ऑफ मीडिया छोटे पत्रकारों के लिए काम कर रहा है। सामाजिक स्थिति अच्छी हो, इसमें पत्रकारों की भूमिका भी अहम है।
संकट में पत्रकारिता
वहीं वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर ने कहा कि सरकार की दमन नीति सामाजिक कल्याण के लिए घातक है। सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है। कई जगहों पर पत्रकारिता पर प्रतिबंध हैं। आज दुनिया में कई जगहों पर पत्रकारिता संकट में है। अगला सम्मेलन पूर्वोत्तर भारत में होना चाहिए ताकि वहां की समस्याएं सामने आ सकें। 2024 में हालात और खराब हो सकते हैं। कई पत्रकारों के लिए वास्तविकता को चित्रित करना कठिन हो गया है।
