Maharashtra: मुंबई में शिवसेना (UBT) ने अपने 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर पोस्टरों के जरिए एक बार फिर शिंदे गुट पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में लगाए गए होर्डिंग्स ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इन पोस्टरों में सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन संदेशों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट पर हमला माना जा रहा है।
पोस्टरों में लिखा गया है, “गद्दार बदले, चेहरे बदले; लेकिन विचारधारा नहीं बदली” और “महाराष्ट्र के लोगों के दिलों में बसने वाली शिवसेना आज भी वही है”। इसके साथ ही एक अन्य संदेश में कहा गया है, “भरोसे के 60 साल — विश्वासघात के तूफान में भी अडिग”।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक पोस्टर अभियान नहीं, बल्कि शिवसेना की विरासत और पहचान को लेकर चल रही लड़ाई का नया अध्याय है।
60 साल की विरासत और संघर्ष का संदेश
UBT द्वारा लगाए गए दूसरे पोस्टरों में पार्टी के संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी को प्रमुखता दी गई है। इनमें लिखा गया है:
“हम जले, हमने संघर्ष किया, और फिर खड़े हो गए”
“विश्वासघात की राख से फिर उठ खड़े होने का संकल्प”
“यही शिवसेना का इतिहास है”
“अग्निपथ पर 60 वर्षों की यात्रा”
इन नारों के जरिए उद्धव ठाकरे गुट ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि तमाम राजनीतिक झटकों और टूट-फूट के बावजूद संगठन मजबूती से खड़ा है और अपनी मूल विचारधारा से समझौता नहीं करेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पोस्टर अभियान?
19 जून 1966 को बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी। छह दशक पूरे होने के मौके पर पार्टी अपनी राजनीतिक विरासत को जनता के सामने नए सिरे से पेश कर रही है।
2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दिया, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के रूप में नई पहचान मिली।
इसी पृष्ठभूमि में लगाए गए ये पोस्टर राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि दोनों गुट खुद को बालासाहेब ठाकरे की असली राजनीतिक विरासत का वारिस बताते रहे हैं।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच पोस्टर पॉलिटिक्स
हाल के दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में कथित “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चाएं तेज रही हैं। विपक्षी दलों और राजनीतिक गलियारों में नेताओं के संभावित दल-बदल को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
ऐसे समय में UBT का यह पोस्टर अभियान पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पोस्टरों में “विश्वासघात”, “संघर्ष” और “विचारधारा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल इसी राजनीतिक संदेश को मजबूत करता है।
मुंबई में फिर शुरू हुई पोस्टर वॉर
मुंबई की राजनीति में पोस्टर वॉर कोई नई बात नहीं है। शिवसेना के दोनों गुट समय-समय पर पोस्टरों और बैनरों के जरिए अपनी ताकत और राजनीतिक संदेश जनता तक पहुंचाते रहे हैं।
स्थापना दिवस के मौके पर शुरू हुई यह नई पोस्टर जंग आने वाले स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों के बीच विरासत, विचारधारा और जनाधार को लेकर सियासी संघर्ष और तेज हो सकता है।
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मुंबई में लगाए गए UBT के नए पोस्टर सिर्फ स्थापना दिवस का संदेश नहीं हैं, बल्कि यह शिवसेना की विरासत और राजनीतिक पहचान को लेकर जारी संघर्ष का सार्वजनिक प्रदर्शन भी हैं।
“गद्दार बदले, विचारधारा नहीं” और “हम जले, फिर खड़े हो गए” जैसे नारों के जरिए उद्धव ठाकरे गुट ने साफ संकेत दिया है कि वह आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में वैचारिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
