सातारा: स्कूल का पहला दिन हर बच्चे के लिए खास होता है, लेकिन महाराष्ट्र के सातारा जिले के मरळी गांव में यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं था। पहली बार स्कूल पहुंचने वाले बच्चों का स्वागत बैलगाड़ी में बैठाकर किया गया। ढोल-ताशों की गूंज, ग्रामीणों का उत्साह और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ने पूरे माहौल को यादगार बना दिया।
सबसे खास बात यह रही कि बच्चों की इस अनोखी सवारी में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभूराज देसाई खुद सारथी बने। बैलगाड़ी की कमान संभालते हुए उन्होंने बच्चों के साथ यात्रा की और उनके पहले स्कूल दिवस को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि सातारा का यह अनोखा प्रवेशोत्सव अब लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
गांव ने बनाया स्कूल का पहला दिन यादगार
पाटण तालुका के मरळी गांव स्थित वत्सलादेवी देसाई जिला परिषद स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत उत्साह और पारंपरिक अंदाज में हुई। स्कूल में पहली बार दाखिला लेने वाले बच्चों को सजाई गई बैलगाड़ी में बैठाकर पूरे गांव में घुमाया गया।
गांव की सड़कों पर जैसे ही बच्चों की यह अनोखी सवारी निकली, ग्रामीण बड़ी संख्या में स्वागत के लिए जुट गए। जगह-जगह बच्चों पर फूल बरसाए गए और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया गया।
मंत्री ने संभाली बैलगाड़ी की कमान
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पर्यटन, खनिकर्म एवं पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री तथा सातारा जिले के पालकमंत्री शंभूराज देसाई भी शामिल हुए। उन्होंने सिर्फ औपचारिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि बच्चों के साथ बैलगाड़ी में बैठकर सारथी की भूमिका निभाई।
मंत्री को अपने बीच देखकर बच्चे भी काफी उत्साहित नजर आए। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश बताया।
स्कूल पहुंचने पर हुआ खास स्वागत
शोभायात्रा के बाद जब बच्चे स्कूल पहुंचे तो उनका फूल देकर स्वागत किया गया। उन्हें शैक्षणिक सामग्री भेंट की गई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
इस दौरान मंत्री शंभूराज देसाई ने बच्चों से बातचीत की और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा और ग्रामीण संस्कृति का सुंदर संगम
मरळी गांव का यह प्रवेशोत्सव केवल एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि शिक्षा और ग्रामीण संस्कृति के सुंदर संगम का उदाहरण भी बना। गांव के लोगों ने मिलकर यह संदेश दिया कि बच्चों की शिक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
बच्चों के चेहरे पर दिखी खुशी, बैलगाड़ी की सवारी और पूरे गांव का उत्साह इस आयोजन को खास बना गया। यही कारण है कि सातारा का यह स्कूल प्रवेशोत्सव अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्यों खास है यह आयोजन?
आज के डिजिटल दौर में जहां अधिकांश स्कूलों में प्रवेश कार्यक्रम औपचारिक तरीके से आयोजित किए जाते हैं, वहीं मरळी गांव ने अपनी परंपरा और संस्कृति को शिक्षा से जोड़कर एक अलग मिसाल पेश की है। इस पहल ने न सिर्फ बच्चों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज की भागीदारी का भी शानदार उदाहरण सामने रखा।
