Saturday, May 9, 2026
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माधवी राजे सिंधिया का निधन, दिल्‍ली एम्‍स में ली अंतिम सांस, ग्वालियर राजघराने की राजमाता

नई दिल्‍ली। स्‍व. माधवराव सिंधिया की धर्मपत्‍नी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का 70 वर्ष की उम्र में बुधवार सुबह निधन हो गया। वे ग्वालियर राजघराने की राजमाता थीं और लंबे समय से बीमार थीं। उन्‍हें 15 फरवरी को दिल्‍ली एम्स में भर्ती किया गया था और तब से ही उनकी तबीयत खराब चल रही थी। पिछले कुछ दिन से वह वेंटिलेटर पर थीं और जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थीं। बताया जा रहा है कि माधवी राजे ने सुबह 9:28 बजे अंतिम सांस ली।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि ये साझा करना चाहते हैं कि राजमाता साहब नहीं रहीं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की माता व ग्वालियर राज घराने की राजमाता माधवी राजे सिंधिया का इलाज पिछले दो महीनों से दिल्ली के एम्स अस्पताल में चल रहा था। पिछले दो सप्ताह से स्थिति बेहद क्रिटिकल थी। आज सुबह 9.28 बजे उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली।

राजमाता माधवी राजे मूलत: नेपाल की रहने वाली थीं। वे नेपाल राजघराने से संबंध रखती थीं। उनके दादा जुद्ध शमशेर बहादुर नेपाल के प्रधानमंत्री थे। राणा वंश के मुखिया भी रहे थे। 1966 में माधवराव सिंधिया के साथ उनका विवाह हुआ था। शादी से पहले राजमाता माधवी राजे का नाम प्रिंसेस किरण राजलक्ष्मी देवी था। ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के माधवराव सिंधिया से 1966 में उनकी शादी हुई। शादी दिल्ली में शानो-शौकत के साथ हुई थी। इस शाही शादी में देश-विदेश से मेहमान शामिल हुए थे।

शादी के बाद मराठी परंपरा के अनुसार नेपाल की राजकुमारी का नाम बदला गया। इसके बाद वह किरण राजलक्ष्मी से माधवीराजे कहलाने लगीं। माधवी और माधवराव का रिश्ता ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने तय किया था। माधवी राजे के ​पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को हुआ था। इसके बाद से वह काफी टूट गई थीं, लेकिन बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और बहू प्रियदर्शनी राजे सिंधिया की मार्गदर्शक रहीं। ज्योतिरादित्य हमेशा अपनी मां से सलाह मशविरा करके फैसला लेते रहे।

माधवराव सिंधिया के निधन के बाद माधवी राजे के राजनीति में आने के कयास भी लगते रहे। माना जा रहा था कि वह 2004 के आम लोकसभा चुनाव में ग्वालियर लोकसभा से चुनाव लड़ सकती थीं। माना जा रहा था कि गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और ग्वालियर से माधवी राजे मैदान में होंगी, क्योंकि उस समय माधवराव के आकस्मिक निधन से लोग भावुक थे, लेकिन माधवी राजे ने खुद को राजनीति से दूर ही रखा। साथ ही पति माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए छोड़ दी। मार्च 2020 में जब सिंधिया राजघराने के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने का निर्णय लिया था, तो उस समय पूरा परिवार उनके साथ था। बेटा और पत्नी तो उनके फैसले में साथ थे ही, पर सबसे ज्यादा सपोर्ट उनकी मां माधवी राजे सिंधिया ने किया था।

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